Prem anand

Prem anand 1- love is the door to God
2- Be your own light
3- kindness is religion

इसके लिए कौन जिम्मेवार है ?
23/07/2026

इसके लिए कौन जिम्मेवार है ?

मेरे साथ होना बड़ा हिम्मत का काम है आप सब फिर भी बने हुए हैं।सादर आभार 🙏🙏
23/07/2026

मेरे साथ होना बड़ा हिम्मत का काम है
आप सब फिर भी बने हुए हैं।
सादर आभार 🙏🙏

आप सभी के भीतर बैठे परमात्मा को मेरा प्रणाम मेरा प्रणाम स्वीकार करें 🙏🙏
23/07/2026

आप सभी के भीतर बैठे परमात्मा को मेरा प्रणाम मेरा प्रणाम स्वीकार करें 🙏🙏

🌹🌹आज की ग़ज़ल 🌹🌹 🌹🌹दिनांक:-23/07/26🌹🌹+++++++++++++++++++++++++++++++++आप आए हैं तो कुछ रोज ठहर भी जाएं।आपको दिल में बसा ...
23/07/2026

🌹🌹आज की ग़ज़ल 🌹🌹
🌹🌹दिनांक:-23/07/26🌹🌹
+++++++++++++++++++++++++++++++++
आप आए हैं तो कुछ रोज ठहर भी जाएं।
आपको दिल में बसा लूं तो चले जाइएगा।।
ग़ज़ल के मिसरा में भी तुमको सँवारू हरदम।
इक"" ग़ज़ल ""और सुना लूं तो चले जाइएगा।।
आप के बिन अभी जीना नहीं सीखा हमने।
अपनी" हस्ती को मिटा लूं तो चले जाइएगा।।
शब ए उल्फ़त "नसीब" में नहीं लिखा अपने।
आँखों"" के" ख़्वाब हटा लूं तो चले जाइएगा।।
मयस्सर ""फिर" कभी तस्कीन होगा कि नहीं।
प्यार"" इक"" बार ""जता लूं तो चले जाइएगा।।
दरमिया"" इश्क़"" की ""तरतीब" नहीं है अपने।
नया ""एहसास"" जगा"" लूं" तो चले जाइएगा।।
चश्मेतर""आंखों"" से""" मैं अलविदा कहूं कैसे।
ख़ुद ""को ""इक बार हंसा लूं तो चले जाइएगा।।
नुमाया"" क्या करूं जज्बात मुतमइन होने का।
ख़ुद ""से ""जज्बात छिपा लूं तो चले जाइएगा।।
हाल ए मुज्तर ना देख कर जब दिल पिघला।
मैं ""अपना"" सर ""कटा लूं तो चले जाइएगा।।
जमाल"" ज़र्द"" पड़ ""गया ""है कैस का देखो।
इश्क़"" में" ख़ुद को जला लूं तो चले जाइएगा।।
स्वामी प्रेम आनंद
वाराणसी उत्तर प्रदेश

23/07/2026
समझदार जहर का भी औषधि तथा मूर्ख औषधि को भी जहर बना लेता है।इसे ध्यान में रखिये अन्यथा परम सत्य बड़े खतरनाक सिद्द होते हैं...
23/07/2026

समझदार
जहर का भी औषधि
तथा मूर्ख औषधि को भी जहर बना लेता है।
इसे ध्यान में रखिये अन्यथा
परम सत्य बड़े खतरनाक सिद्द होते हैं।
पैगम्बरों ने, ब्रह्मज्ञानियों ने कहा जगत माया है।
आपने कहा बहुत अच्छा है
जब सब माया ही है तो अड़चन क्या है!
अब जो करो अच्छा या बुरा सब स्वप्नवत है।
परम ज्ञान मूढ़ता का स्रोत हो गया।
दोनों चीजें असार हो गईं–शुभ भी, अशुभ भी।
न आपका रूपांतरण हुआ, न समाज का।
माया के सिद्धांत ने सब को भ्रमित कर दिया।
परम सत्य के साथ एक खतरा है कि
वह बहुत ऊंचा होता है;
इसे सब नहीं समझ सकते।

सब का मंगल हो!
❣️

*गीता दर्शन–(भाग–7)*�*अध्‍याय—16  (प्रवचन—पहला) — दैवी संपदा का अर्जन*अभय, अंतःकरण की अच्छी प्रकार से शुद्धि।अंतःकरण के ...
23/07/2026

*गीता दर्शन–(भाग–7)*�*अध्‍याय—16 (प्रवचन—पहला) — दैवी संपदा का अर्जन*
अभय, अंतःकरण की अच्छी प्रकार से शुद्धि।
अंतःकरण के साथ बड़ी भ्रांतियां जुड़ी हैं। समाज ने अंतःकरण का बड़ा उपयोग किया है। समाज की पूरी धारणा ही अंतःकरण के शोषण पर निर्भर है। समाज सिखा देता है बचपन से ही हर बच्चे को, क्या करने योग्य है, क्या करने योग्य नहीं है। और इस बात को इतने जोर से स्थापित करता है, हृदय में इस बात को इतनी बार पुनरुक्त किया जाता है कि कंडीशनिंग, संस्कारबद्ध धारणा बैठ जाती है। फिर जब भी आप उसके विपरीत जाने लगते हैं, कि समाज का सिखाया हुआ अंतःकरण फौरन विरोध खड़ा करता है। इसलिए हर समाज के पास अलग—अलग तरह के अंतःकरण हैं। अगर आप एक शाकाहारी घर में पैदा हुए हैं, तो उस घर ने आपको शाकाहारी का अंतःकरण दिया। अगर मांस आपके सामने आ जाए, तो आप सिर्फ ग्लानि से भरेंगे। आपकी जीभ से पानी और रस नहीं बहेगा, सिर्फ ग्लानि; वमन हो सकता है, उल्टी आ सकती है।
यही मांस किसी दूसरे के सामने, जो मांसाहारी घर में पैदा हुआ है, बड़े स्वाद को जगा सकता है। इसी मांस को देखकर उसकी सोई हुई भूख जग सकती है; भूख न भी हो, तो भी भूख लग सकती है। एक दूसरे शाकाहारी घर में पैदा व्यक्ति को इसी मांस को देखकर बड़ी जुगुप्सा, बड़ी घृणा पैदा होती है।
निश्चित ही, यह अंतःकरण असली अंतःकरण नहीं है। यह अंतःकरण सिखाया हुआ, शिक्षित अंतःकरण है। यह समाज ने उपयोग किया हुआ है। गलत और सही का सवाल नहीं है। समाज को एक बात समझ में आ गई है कि अगर व्यक्तियों को नियंत्रण में रखना हो, व्यवस्था में रखना हो, तो इसके पहले कि उनका वास्तविक अंतःकरण बोलना शुरू हो, हमें जो—जो धारणाएं डालनी हों, उनमें डाल देनी चाहिए।
मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि सात वर्ष की उम्र तक आपका आधा मस्तिष्क निर्मित हो जाता है। आधा, पचास प्रतिशत, सात वर्ष में! फिर पूरी जिंदगी में शेष पचास प्रतिशत निर्मित होता है। और यह जो पचास प्रतिशत सात वर्ष में निर्मित होता है, यह आधार है। इसके विपरीत जाना कठिन है। फिर पूरी जिंदगी इसके अनुकूल ही ले जाना आसान है। और अगर इसके विपरीत आप ले गए, तो बड़ी दुविधा और बड़ी कलह में जिंदगी बीतेगी।
इसलिए सभी तथाकथित धार्मिक संप्रदाय बच्चों का शीघ्रता से शोषण करने को उत्सुक होते हैं। जो धर्म भी अपने बच्चों को धार्मिक शिक्षा नहीं देता, फिर बाद में आशा नहीं रख सकता। सात वर्ष के पहले ही धारणाएं प्रविष्ट हो जानी चाहिए। धारणाएं मजबूत भीतर बैठ जाएं, तो वास्तविक अंतःकरण की आवाज सुनाई ही नहीं पड़ती; समाज के द्वारा दिया गया अंतःकरण ही बीच में बोलता रहता है।
कृष्ण जब कहते हैं, अंतःकरण की अच्छे प्रकार से शुद्धि, तो वे यही कह रहे हैं कि समाज ने जो धारणाएं दी हैं, उनसे जब तक छुटकारा न हो अंतःकरण का, तब तक वास्तविक आपकी आत्मा बोल न पाएगी। हिंदू बोल सकता है भीतर से, मुसलमान बोलेगा, जैन बोलेगा, ईसाई बोलेगा, आस्तिक—नास्तिक बोलेगा। लेकिन आप जो लेकर पैदा हुए हैं, वह जो दैवी स्वर आपके भीतर है, वह
छिपा रहेगा। उसके प्रकट होने के लिए अंतःकरण की सारी परतें अलग हो जानी चाहिए।
क्यों कृष्ण अर्जुन से ऐसा कह रहे हैं? क्योंकि अर्जुन जो ज्ञान की बातें कर रहा है, वे उसके अंतःकरण से नहीं आ रही हैं; वे सामाजिक धारणाएं हैं। वह कह रहा है, ये मेरे गुरु हैं, तो जिस गुरु के मैंने चरण छुए, उसकी मैं हत्या कैसे करूं! कि ये मेरे सगे भाई हैं, कि मेरे बंधु—बांधव हैं, ये मेरे मित्र, प्रियजन हैं। ये जो उस तरफ खड़े हैं युद्ध में, इसमें अनेक मेरे संबंधियों के संबंधी या संबंधी हैं। भीष्म पितामह उस तरफ हैं, वे मेरे आदर योग्य हैं। इन सबके साथ मैं कैसे युद्ध करूं? ये मेरे अपने हैं, ये सगे—संबंधी हैं।
कौन आपका अपना है?
जीसस एक भीड़ में खड़े थे। और उन्होंने एक बड़ा कठोर वचन उपयोग किया है, जिसकी निरंतर आलोचना की गई है। क्योंकि जीसस जैसे व्यक्ति से ऐसे शब्द की आशा नहीं थी। किसी ने भीड में आवाज दी कि जीसस, तुम्हारी मां मरियम तुमसे मिलने बाहर आई है। तो जीसस ने कहा, मेरी न कोई मां है, न मेरा कोई पिता है।
कठोर वचन है। और जीसस जैसे अत्यंत करुणावान, महा करुणावान व्यक्ति से ऐसी बात की आशा नहीं है। निश्चित ही, उनका प्रयोजन कुछ भिन्न है।
जीसस यह कह रहे हैं कि कौन मां है! कौन पिता है! जहां तक शुद्ध अंतःकरण का सवाल है, न कोई पिता है, न कोई माता है। न कोई भाई है, न कोई बंधु है। जहां तक समाज के द्वारा दिए गए अंतःकरण का संबंध है, मां है, पिता है, भाई—बंधु हैं। ये सब सिखावन हैं, से सब संस्कार हैं।
क्रमशः
ओशो गीता दर्शन

23/07/2026

🌹🌿ओशो मेरे गुरु 🌿🌹

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