19/09/2023
बहुत सी बातों से हमे शिकायत होती है....मूड खराब हो जाता है..., तो ऐसे में हम फट पड़ते हैं, तो लहजा और शब्द भी खराब हो जाते हैं। कुछ खास करीबी समझ जाते हैं और झेल भी लेते हैं। अक्सर हम किसी और की गलती की सजा खुद को ही या किसी और को दे रहे होते हैं . या अपना गुस्सा कहीं और निकाल रहे होते हैं।
पर इस गीत में देखिए कि कितने खूबसूरत शब्दों से, कितनी मुहब्बत से, शिष्टता और कोमल लहजे से शिकायत की गई है ....
उफ्फ्फ!!! लिखने वाले ने कितने खूबसूरत शब्दों से भावों को लिखा है, कंपोज़ करने वाले ने कितनी मिठास घोली है, मधुर धुन बनायी है, और उसपे लता ने कितनी, कितनी, जहिनीयत से कुछ जगह वाक्यों को तोड़ तोड़ के, शब्दों को धीमे धीमे, रुक रुक के गाया है...बेहतरीन! कर्णप्रिय! ..दिल पे लग जाने वाला तीर सा है ये..हिंदी फिल्म संगीत के स्वर्णिम युग के प्रतिनिधि गीतों में से एक है ये..इस स्तर पर हिंदी उर्दू के बीच की रेखा भी गायब हो जाती है..केवल भावनाएँ, उनकी अभिव्यक्ति , और रंग रह जाते हैं दिलोदिमाग पे बस..शिकायत हो तो ऐसी हो..
है इसी में प्यार की आबरू,
वो ज़फ़ा करे मैं वफ़ा करूँ,
जो वफ़ा भी काम न आ सके,
तो वो ही कहे कि मैं क्या करूँ?
है इसी में प्यार की आबरू..
मुझे ग़म भी उनका अज़ीज़ है,
कि उन्हीं की दी हुई चीज़ है,
यही ग़म है अब मेरी ज़िंदगी,
इसे कैसे दिल से जुदा करूँ..
जो न बन सके मैं वो बात हूँ,
जो न ख़त्म हो मैं वो रात हूँ,
ये लिखा है मेरे नसीब में,
यूँ ही शम्मा बन के जला करूँ..
न किसी के दिल की हूँ आरज़ू,
न किसी नज़र की हूँ जुस्तजू,
मैं वो फूल हूँ जो उदास हूँ,
न बहार आए तो क्या करूँ,
है इसी में प्यार की आबरू, वो जफ़ा करे मैं वफ़ा करूं,
जो वफ़ा भी काम न आ सके, तो वो ही कहे कि मैं क्या करूँ....
Singer: Lata Mangeshkar, Movie: Anpadh (1962) ; Actor: Mala Sinha ; Music Director: Madan Mohan ; Lyricist: Raja Mehdi Ali Kha