01/07/2020
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मेरे कमरे के बंद पंखे में
एक गौरैया के जोड़े ने
अपना घोसला बना लिया है।
वो रोज़ आते हैं,
पंखे से खिड़की पर,
खिड़की से पंखे पर
कमरे में फुदकते हुए,
चिं चीं कर मुझसे बतियाते हैं
और अकेलेपन से ग्रसित मैं
जब बिन कुछ कहे
उन्हें बस दो टुक ताकती हूं।
तो खिसिया कर फुर्र हो जाते हैं।
ये सिलसिला
दिन भर चलता रहता है, क्वारिंटाइन की शुरुआत से आज तक ।
वो ये नहीं जानते कि
आज से
अप्रिल का महीना लग गया।
ना ही ये कि
इस जगह लोगों के आने जाने पर
प्रतिबंध लगा दिया गया है। वो ये नहीं जानते
कि पंखा ना चला कर
मैंने उनकी जान बचाई है।
ना ही ये कि
रोज़ आ कर
उन्होंने
मेरी जान बचाई है।
हमारे बीच प्रेम का
एक मौन का रिश्ता है। कितना अच्छा होता
अगर दुनिया का हर रिश्ता
एक ऐसा ही मूक रिश्ता होता। - सुप्रिया मिश्रा
@ The Habitat Studios