16/03/2026
"भारत की विदेश नीति अब ढोलक बन गई है। कभी अमेरिका की ताल पर, कभी इज़राइल की झंकार पर, और कभी पड़ोसियों के सुर में। लेकिन जब कोई अपनी ही ताल खो देता है तो नतीजा यही होता है—सिर्फ़ शोर, कोई संगीत नहीं।
मोदी सरकार ने जियो-पॉलिटिक्स को ऐसे चलाया जैसे मोहल्ले का DJ...बेस तो तेज़ है, पर सुर कहीं गुम हो गया है। जनता गुस्से में है, जहाज़ रास्ता ढूंढ रहे हैं, और तेल की राजनीति में भारत का चेहरा धुंधला पड़ गया है।
कहते हैं कि विदेश नीति राष्ट्र की रीढ़ होती है। लेकिन यहाँ रीढ़ की जगह ‘रील’ बन गई है..हर मंच पर फोटो, हर मंच पर भाषण, और ज़मीनी हकीकत में सिर्फ़ ठोकरें।
जब आप दोनों तरफ का ढोल बजाते हैं, तो याद रखिए, तालियाँ नहीं, ठहाके मिलते हैं। और यही ठहाके आज भारत की कूटनीति पर गूंज रहे हैं।"
अब गिड़गिड़ाना ही अंतिम लक्ष्य है.... ।
नगर पंचायत मनियर , बलिया