11/11/2018
*देखी जो नब्ज मेरी,*
*हँस कर बोला वो हकीम :*
*"जा जमा ले महफिल पुराने दोस्तों के साथ,*
*तेरे हर मर्ज की दवा वही है*
*दोस्तो से रिश्ता रखा करो जनाब...*
*ये वो हक़ीम हैं*
*जो अल्फ़ाज़ से इलाज कर दिया करते हैं।*
*खींच कर उतार देते हैं उम्र की चादर,*
*ये कम्बख्त दोस्त...*
*कभी बूढ़ा नहीं होने देते।*
*बच्चे वसीयत पूछते हैं,*
*रिश्ते हैसियत पूछते हैं,*
*वो दोस्त ही हैं जो*
*आपकी खैरियत पूछते हैं.....*
अजीत सिंह
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