25/11/2020
आज दिनांक 25/11/2020 को हमारी समृद्ध लोक परम्परा का प्रतीक उत्तराखंड का लोक पर्व 'इगास बग्वाल' है। यह पर्व कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी याने विष्णु भगवान के शयनावस्था से जागृत होने की तिथि देव उठनी को मनाया जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु जी की पूजा की जाती है। हमारी सुख समृद्धि में प्रकृति, गौ वंश और गौरवशाली कृषि उत्पादों का बड़ा महत्व रहा है। मान्यता है कि 400 वर्ष पूर्व गढवाल के राजा महपत शाह के सेनापति वीर भड़ माधो सिंह भण्डारी तिब्बत के द्वापाघाट युद्ध में विजय के बाद दीपावली के 11 दिन तक नहीं लौटने पर लोगों में अनहोनी की आशंका हो गई। लेकिन 11 दिन बाद वीर भड़ माधो सिंह भण्डारी के सकुशल लौटने पर लोगों ने यह त्योहार मनाया। दूसरी मान्यता है कि भगवान श्री राम के लंका विजय 14 वर्ष बाद अयोध्या लौटने की खुशी में दीपावली से प्रारम्भ और कार्तिक एकादशी को सम्पन्न इगास बग्वाल के रुप में मनाया जाता है। इस दिन गौ वंश गाय, बैल और बछड़ों की पूजा की जाती है उन्हें तिलक किया है तथा भात, झंगोरा, मंडूवे का हलवा (बाड़ी)और जौ के लड्डू बना कर गौ वंश को खिलाया जाता है। घरों में स्वाली, पकोड़ी और भूड़ा आदि के पकवान बनाकर बांटे और खाये जाते हैं। रात्रि में एक रस्सी पर लकड़ी के गट्ठर पर अग्नि प्रज्वलित कर जिसे 'भैलो' कहते हैं, सावधानी पूर्वक सिर के ऊपर घुमाकर मनोरंजक कर्तब किया जाता है। एक खुले स्थान में ढोल नगाड़ों के साथ गीत गाते हैं, मनोरंजक हास्य ब्यंग तथा खुशी में नृत्य करते हुए उल्लासपूर्वक त्योहार मनाते हैं। आइए हम सब कोरोना महामारी की सावधानी बरतते हुए इस त्योहार को प्रतीकात्मक रुप में मनाऐं। आप सभी को सपरिवार 'इगास बग्वाल 2020' की हार्दिक शुभकामनाएं 💐💐💐💐💐💐🙏