26/03/2025
नहारी, यानी सुबह-सुबह नहार मुँह खाना, इसी लिए इसका नाम नहारी है। मज़े में क्या ही लज़ीज़ होती है।
मुग़ल दौर से चली आ रही ये रिवायत, आज भी दिल को छू जाती है। धीमी आंच पर पकी हुई नहारी, गोश्त की नरमी और मसालों की खुशबू।
वैसे तो नहारी सुबह का नाश्ता हुआ करती थी और अब भी है पर अब इसे रात में खाने का चलन बन गया है। सुबह के वक़्त, खाली पेट नहारी खाने का अपना ही लुत्फ़ है। नान या रोटी के साथ, अदरक और धनिया से गार्निश की हुई नहारी, ओहहो क्या कहने। इसे खाने के फ़ायदे भी कम नहीं जनाब ताकत का खज़ाना है, हाज़मा दुरुस्त रखता है और हड्डियों को भी मज़बूती देता है। सुबह सुबह खा लें तो रात तक कि एनर्जी रहती है।
मटन हो या बड़े की, हर तरह की नहारी का अपना अलग मज़ा है। पर जो मज़ा बड़े की नहारी में है वो किसी भी नहारी में नही। बस ज़रा तेल-मसाले का ख्याल रखना, ज़्यादा न हो जाए। वैसे आजकल रमज़ान में आप सेहरी में भी नहारी के साथ एक तंदूरी नान खा सकते हैं।तो आइये निहारी का लुत्फ़ लीजिए हमारे पास हाजी वली मुहम्मद बिरयानी शॉप कर्नल गंज कानपुर