Jannat in Kaithal

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MERE SATGUR HI HAI MERE PAPA
26/06/2015

MERE SATGUR HI HAI MERE PAPA

06/09/2014
09/12/2013
ना मुस्कुराने को जी चाहता है.ना आँसू बहाने को जी चाहता है.आपकी याद मे क्या लिखेबस आपके पास ही आने को जी चाहता है.
05/12/2013

ना मुस्कुराने को जी चाहता है.
ना आँसू बहाने को जी चाहता है.
आपकी याद मे क्या लिखे
बस आपके पास ही आने को जी चाहता है.

सिख धर्म (खालसा पंथ) का उदय गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के साथ होता है। सिख का अर्थ है शिष्य। जो लोग गुरु नानक जी की शि...
17/11/2013

सिख धर्म (खालसा पंथ) का उदय गुरु नानक देव जी की शिक्षाओं के साथ होता है। सिख का अर्थ है शिष्य। जो लोग गुरु नानक जी की शिक्षाओं पर चलते गए, वे सिख हो गए। गुरु नानक देव जी का प्रकाश 1469 ईस्वी में लाहौर के तलवंडी (अब ननकाना साहिब) में हुआ। बचपन से ही उनका मन एकांत, चिंतन और सत्संग में लगता था। संसारिक चीजों में उनका मन लगाने के लिए उनका विवाह कर दिया गया। गुरु नानक जी के यहां दो पुत्र हुए। परन्तु यह सब गुरु नानक जी को परमात्मा के नाम से दूर नहीं कर पाया। उन्होंने घर छोड़कर घूमना शुरू कर दिया। पंजाब, मक्का, मदीना, काबुल, सिंहल, कामरूप, पुरी, दिल्ली, कश्मीर, काशी, हरिद्वार जैसी जगहों पर जाकर उन्होंने लोगों को उपदेश दिए। उनका कहना था कि हिन्दू-मुस्लिम अलग नहीं हैं और सबको एक ही भगवान ने बनाया है। उन्होंने कहा, एक ओंकार (ईश्वर एक है), सतनाम (उसका नाम ही सच है), करता पुरख (सबको बनाने वाला), अकाल मूरत (निराकार), निरभउ (निर्भय), निरवैर (किसी का दुश्मन नहीं), अजूनी सैभं (जन्म-मरण से दूर) और अपनी सत्ता कायम रखने वाला है। ऐसे परमात्मा को गुरु नानक जी ने अकाल पुरख कहा, जिसकी शरण गुरु के बिना संभव नहीं। उनके सहज ज्ञान के साथ लोग जुड़ते गए। उनके शिष्य बनते गए। गुरु नानक से चली सिख परम्परा में नौ और गुरु हुए। अंतिम और दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी थे। उन्होंने अपने बाद गुरुओं की वाणी के ग्रंथ को गुरु की गद्दी सौंपी और सिखों से कहा- अब कोई देहधारी गुरु नहीं होगा। सभी सिखों को आदेश है कि वे गुरु ग्रंथ साहिब जी को ही गुरु मानेंगे। तब से सिख धर्म में पवित्र गुरु ग्रंथ साहिब ही को गुरु माना गया। यह धर्म विश्व का पांचवां बड़ा धर्म है.. . . .

10/11/2013

Har line ko dhyaan se padhein

✅Gareeb Dur tak chalta hai. . .Khana khane ke liye. . . .
✅Ameer meelo chalta hai Khana pachane ke liye. . . .
✅Kisi ke paas khane ke liye ek waqt ki roti nahi hai. . . .
✅Kisi ke paas roti khane ke liye Waqt hi nahi hai. . . .

✅Koi lachaar hai isi liye beemar hai. . .
✅Koi beemar hai isi liye lachaar hai. . .
✅Koi apno ke liye roti chod deta hai. . .
✅Koi roti ke liye apno ko chod deta hai

✅Ye duniya bhi kitni nirali hai.
✅Kabhi waqt mile to sochna. . . .
✅Kabhi choti si chot lagne pe rote the,
aaj dil tut jaane pe bhi sambhal jate hai!

✅Pehle hum dosto k sath rehte the,
aaj dosto ki yaadon me rehte hai!
✅Pehle ladna manana roz ka kam tha,
aaj ek bar ladte he to rishte kho jate hai.

✅Sach me zindagi ne bahut kuch sikha dia,
jane kab hamko itna bada bana diya ... ... ...

क्रोध का अपना पूरा खानदान है ॥ क्या आप जानते है ???:•~ क्रोध की एक लाडली बहन है - जिद ॥:•~ क्रोध की पत्नी है - हिंसा ॥:•...
18/10/2013

क्रोध का अपना पूरा खानदान है ॥ क्या आप जानते है ???

:•~ क्रोध की एक लाडली बहन है - जिद ॥
:•~ क्रोध की पत्नी है - हिंसा ॥
:•~ क्रोध का बडा भाई है - अहंकार ॥
:•~ क्रोध का बाप जिससे वह डरता है - भय ॥
:•~ क्रोध की बेटियाँ है - निंदा और चुगली ॥
:•~ क्रोध का बेटा है - वैर ॥
:•~ इस खानदान की नकचढी बहु है - ईर्ष्या ॥
:•~ क्रोध की पोती है - घृणा ॥
:•~ क्रोध की मां है - उपेक्षा ॥

तो क्रोध के खानदान से हमेंशा दूर रहिये...॥ —

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