18/01/2022
21 मार्च 2020, एक ऐसा दिन जिसके बाद बहुत कुछ बदलने वाला था पर सभी लोग अनजान थे। धीरे धीरे एक ऐसी महामारी जिसने आमजन से लेकर बड़ी-बड़ी हस्तियों तक को अपने आगोश में लिया। लोगों का जीवन बद से बदहाल हो गया और न जाने कितनी मार पड़ी लोगों के कारोबार पर, उनकी नौकरियों पर, सब दूर। कुछ समय बाद सब कुछ सामान्य होने लगा, लेकिन कुछ चीजें नहीं बदली, कुछ चीजें ना ही खुली, नहीं फिर से चालू हुई। हजारों शिक्षक, हजारों मजदूर जिनके हाथ से नौकरियां चली गई अपना पेट पालने के लिए दूसरे रास्ते ढूंढने लग। ऐसे में हम जैसे कुछ लोगों ने हिम्मत करके अपना खुद का व्यापार चलाना चाहा क्योंकि पैसा तो पास में था नहीं, इसलिए कम लागत में चौराहों पर जाकर खड़े होकर हमने अपने बिजनेस को शुरू किया। एक दिन अचानक से सब को वहां से हटा दिया गया। इंतजार किया,1 दिन,2 दिन और यह समय बीतता गया लगभग 2 हफ्तों तक। समस्या फिर से जटिल होने लगी, वही 2020 वाला डर सताने लगा पर हिम्मत करके आगे बढ़कर हमने फिर से शुरुआत की।
आज उस शुरुआत की शुरुआत है उम्मीद करती हूं जितना साथ
हम लोगों को चौराहों पर मिला वहीं यहां भी मिलेगा।
आप लोगों के लिए एक ऐसी जगह, ऐसा स्वाद जो आप कभी भूल नहीं पाएंगे।