15/11/2015
. ।। ॐ ।।
🚩||सुप्रभातम्||🚩
««« आज का पंचांग »»»
कलियुगाब्द.............5117
विक्रम संवत्...........2072
शक संवत्..............1937
मास...................कार्तिक
पक्ष .....................शुक्ल
तिथी....................चतुर्थी
रात्रि 02.36 पर्यंत पश्चात पंचमी
तिथि स्वामी.............यम
नित्यदेवी...............भेरुंडा
रवि................दक्षिणायण
सूर्योदय.......06.39.03 पर
सूर्यास्त.......05.42.09 पर
नक्षत्र.......................मूल
संध्या 07.38 पर्यंत पश्चात पूर्वाषाढा
योग........................धृति
रात्रि 03.32 पर्यंत पश्चात शूल
करण....................वणिज
दोप 02.33 पर्यन्त पश्चात विष्टि
ऋतु........................हेमंत
दिन......................रविवार
🇬🇧 आंग्ल मतानुसार :-
15 नवम्बर सन 2015 ईस्वी ।
👳🏻 बिरसा मुंडा जयंती :-
बिरसा मुंडा 19वीं सदी के एक प्रमुख आदिवासी जननायक थे। उनके नेतृत्व में मुंडा आदिवासियों ने 19वीं सदी के आखिरी वर्षों में मुंडाओं के महान आन्दोलन उलगुलान को अंजाम दिया। बिरसा को मुंडा समाज के लोग भगवान के रूप में पूजते हैं।
सुगना मुंडा और करमी हातू के पुत्र बिरसा मुंडा का जन्म १५ नवम्बर १८७५ को झारखंड प्रदेश मेंराँची के उलीहातू गाँव में हुआ था। साल्गा गाँव में प्रारम्भिक पढाई के बाद वे चाईबासा इंग्लिश मिडिल स्कूल में पढने आये। इनका मन हमेशा अपने समाज की ब्रिटिश शासकों द्वारा की गयी बुरी दशा पर सोचता रहता था। उन्होंने मुंडा लोगों को अंग्रेजों से मुक्ति पाने के लिये अपना नेतृत्व प्रदान किया। १८९४ में मानसून के छोटानागपुर में असफल होने के कारण भयंकर अकाल और महामारी फैली हुई थी। बिरसा ने पूरे मनोयोग से अपने लोगों की सेवा की।
1 अक्टूबर 1894 को नौजवान नेता के रूप में सभी मुंडाओं को एकत्र कर इन्होंने अंग्रेजो से लगान माफी के लिये आन्दोलन किया। 1895 में उन्हें गिरफ़्तार कर लिया गया और हजारीबाग केन्द्रीय कारागार में दो साल के कारावास की सजा दी गयी। लेकिन बिरसा और उसके शिष्यों ने क्षेत्र की अकाल पीड़ित जनता की सहायता करने की ठान रखी थी और अपने जीवन काल में ही एक महापुरुष का दर्जा पाया।
जनवरी 1900 डोमबाड़ी पहाड़ी पर एक और संघर्ष हुआ था जिसमें बहुत से औरतें और बच्चे मारे गये थे। उस जगह बिरसा अपनी जनसभा को सम्बोधित कर रहे थे। बाद में बिरसा के कुछ शिष्यों की गिरफ़्तारियाँ भी हुईं। अन्त में स्वयं बिरसा भी 3 फरवरी 1900 को चक्रधरपुर में गिरफ़्तार कर लिये गये।
बिरसा ने अपनी अन्तिम साँसें 9 जून 1900 को राँची कारागार मे लीं। आज भी बिहार, उड़ीसा, झारखंड, छत्तीसगढ और पश्चिम बंगाल के आदिवासी इलाकों में बिरसा मुण्डा को भगवान की तरह पूजा जाता है।
बिरसा मुण्डा की समाधि राँची में कोकर के निकट डिस्टिलरी पुल के पास स्थित है। वहीं उनका स्टेच्यू भी लगा है। उनकी स्मृति में रांची में बिरसा मुण्डा केन्द्रीय कारागार तथा बिरसा मुंडा हवाई-अड्डा भी है।
🌞 सूर्य षष्ठी व्रत प्रारम्भ :
छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है।
छठ पर्व छठ, षष्टी का अपभ्रंश है। कार्तिक मास की अमावस्या को दीवाली मनाने के तुरंत बाद मनाए जाने वाले इस चार दिवसिए व्रत की सबसे कठिन और महत्वपूर्ण रात्रि कार्तिक शुक्ल सष्ठी की होती है। इसी कारण इस व्रत का नामकरण छठ व्रत हो गया।
यह पर्व चार दिनोंका है। भैयादूज के तीसरे दिनसे यह आरंभ होता है। पहले दिन सैंधा नमक, घी से बना हुआ अरवा चावल और कद्दूकी सब्जी प्रसाद के रूप में ली जाती है। अगले दिनसे उपवास आरंभ होता है। इस दिन रात में खीर बनती है। व्रतधारी रात में यह प्रसाद लेते हैं। तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य यानी दूध अर्पण करते हैं। अंतिम दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य चढ़ाते हैं।
1⃣ पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया जाता है। सबसे पहले घर की सफाइ कर उसे पवित्र बना लिया जाता है। इसके पश्चात छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजनोपरांत ही भोजन ग्रहण करते हैं। भोजन के रूप में कद्दू-दाल और चावल ग्रहण किया जाता है। यह दाल चने की होती है।
🔯 शुभ अंक..............7
♈ शुभ रंग.............श्वेत
💮 राहुकालः-
संध्या 04.17 से 07.39 तक ।
💮 अभिजीत मुहूर्त :-
सायं 05.39 से 07.17 तक ।
💮 दिशाशूल :-
पश्चिमदिशा - यदि आवश्यक हो तो दलिया, घी या पान का सेवनकर यात्रा प्रारंभ करें।
💮 चौघडिया :-
प्रात: 08.04 से 09.26 तक चंचल
प्रात: 09.26 से 10.48 तक लाभ
प्रात: 10.48 से 12.10 तक अमृत
दोप. 01.33 से 02.55 तक शुभ
सायं 04.17 से 05.39 तक शुभ
रात्रि 07.17 से 08.55 तक अमृत
रात्रि 08.55 से 10.33 तक चंचल ।
💮 आज का मंत्रः
।। ॐ पूष्णे नम: ।।
📢 संस्कृत सुभाषितानि:-
चतुर्थ अध्याय - ज्ञान कर्मसंन्यास योग:
चातुर्वर्ण्यं मया सृष्टं
गुणकर्मविभागशः।
तस्य कर्तारमपि मां
विद्ध्यकर्तारमव्ययम्॥४-१३॥
न मां कर्माणि लिम्पन्ति
न मे कर्मफले स्पृहा।
इति मां योऽभिजानाति
कर्मभिर्न स बध्यते॥४-१४॥
अर्थात :
चारों वर्णों (ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र) को उनके गुण और कर्मों के विभाग पूर्वक मेरे द्वारा रचा गया है। उस सृष्टि-रचनादि कर्म का कर्ता होने पर भी मुझ अविनाशी को तुम अकर्ता ही जानो॥13॥
मुझे कर्मों के फल की कामना नहीं है इसलिए कर्म मुझे लिप्त नहीं करते। इस प्रकार जो तत्त्व से मुझे जान लेता है, वह भी कर्मों से नहीं बँधता॥14॥
🍃 आरोग्यं :-
एलर्जी या अति संवेदनशीलता आज की लाइफ में बहुत तेजी से बढ़ती हुई सेहत की बड़ी परेशानी है कभी कभी एलर्जी गंभीर परेशानी का भी सबब बन जाती है जब हमारा शरीर किसी पदार्थ के प्रति अति संवेदनशीलता दर्शाता है तो इसे एलर्जी कहा जाता है |
✏ एलर्जी के कारण –
एलर्जी किसी भी पदार्थ से ,मौसम के बदलाव से या आनुवंशिकता जन्य हो सकती है एलर्जी के कारणों में धूल ,धुआं ,मिटटी पराग कण, पालतू या अन्य जानवरों के संपर्क में आने से ,सौंदर्य प्रशाधनों से ,कीड़े बर्रे आदि के काटने से,खाद्य पदार्थों से एवं कुछ अंग्रेजी दवाओ के उपयोग से एलर्जी हो सकती है सामान्तया एलर्जी नाक ,आँख ,श्वसन प्रणाली ,त्वचा व खान पान से सम्बंधित होती है किन्तु कभी कभी पूरे शरीर में एक साथ भी हो सकती है जो की गंभीर हो सकती है l
🚫 एलर्जी से बचाव -
एलर्जी से बचाव ही एलर्जी का सर्वोत्तम इलाज है इसलिए एलर्जी से बचने के लिए इन उपायों का पालन करना चाहिए
1. य़दि आपको एलर्जी है तो सर्वप्रथम ये पता करें की आपको किन किन चीजों से एलर्जी है इसके लिए आप ध्यान से अपने खान पान और रहन सहन को वाच करें l
2. घर के आस पास गंदगी ना होने दें l
3. घर में अधिक से अधिक खुली और ताजा हवा आने का मार्ग प्रशस्त करें l
4. जिन खाद्य पदार्थों से एलर्जी है उन्हें न खाएं l
5. एकदम गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम वातावरण में ना जाएं l
6. बाइक चलाते समय मुंह और नाक पर रुमाल बांधे,आँखों पर धूप का अच्छी क़्वालिटी का चश्मा लगायें l
7. गद्दे, रजाई,तकिये के कवर एवं चद्दर आदि समय समय पर गरम पानी से धोते रहे l
8. रजाई ,गद्दे ,कम्बल आदि को समय समय पर धूप दिखाते रहे l
9. पालतू जानवरों से एलर्जी है तो उन्हें घर में ना रखें l
10 ज़िन पौधों के पराग कणों से एलर्जी है उनसे दूर रहे l
11 घर में मकड़ी वगैरह के जाले ना लगने दें समय समय पर साफ सफाई करते रहे l
12 धूल मिटटी से बचें ,यदि धूल मिटटी भरे वातावरण में काम करना ही पड़ जाये तो फेस मास्क पहन कर काम करेंl
💮 आज का राशिफल :-
🐑 राशि फलादेश मेष :-
तीर्थयात्रा संभव है। बाहरी सहयोग मिलेगा। निवेश आदि लाभप्रद रहेंगे। प्रतिद्वंद्वी किनारा काटेंगे। घर की चिंता रहेगी।
🐂 राशि फलादेश वृष :-
वाहन, मशीनरी व अग्नि के प्रयोग में सावधानी रखें। झंझटों में न पड़ें। जोखिम-जमानत के कार्य टालें। अस्वस्थता रहेगी।
👫 राशि फलादेश मिथुन :-
प्रेम-प्रसंग में अनुकूलता रहेगी। मित्र-संबंधी मिलेंगे। उनके द्वारा कार्यसिद्धि होगी। धन प्राप्ति सुगम होगी।
🐙 राशि फलादेश कर्क :-
चिंता, कष्ट व भय का वातावरण बनेगा। जल्दबाजी न करें। संपत्ति के कार्य लाभ देंगे। उन्नति होगी।
🐯 राशि फलादेश सिंह :-
अचानक घटनाएं घट सकती हैं, सावधानी रखें। घर के किसी सदस्य की चिंता रहेगी। विद्यार्थी सफल रहेंगे।
👩🏻 राशि फलादेश कन्या :-
उत्तेजना घातक सिद्ध हो सकती है। वाणी पर नियंत्रण रखें। दु:खद समाचार मिल सकते हैं, जोखिम न लें।
📟 राशि फलादेश तुला :-
यात्रा सफल रहेगी। शरीर का ध्यान रखें। प्रयास सफल सिद्ध होंगे। पद-प्रतिष्ठा का लाभ संभव है। जोखिम न लें।
🐉 राशि फलादेश वृश्चिक :-
भय, पीड़ा, तनाव व चिंता का वातावरण बनेगा। शुभ समाचार मिल सकते हैं। निवेश आदि लाभप्रद रहेंगे।
🔱 राशि फलादेश धनु :-
बेरोजगारी दूर हो सकती है, प्रयास करें। यात्रा सफल रहेगी। धन प्राप्ति सुगम होगी। विरोधी सक्रिय रहेंगे।
🐊 राशि फलादेश मकर :-
फालतू खर्च बढ़ेगा। कर्ज लेना पड़ सकता है। कुसंगति से बचें। चिंता तथा तनाव रहेंगे। दूसरों से अपेक्षा न करें।
🍯 राशि फलादेश कुंभ :-
दुष्ट जन कष्ट पहुंचाएंगे। जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रहेगी। बकाया वसूली होगी। यात्रा सफल रहेगी।
🐳 राशि फलादेश मीन :-
कुसंगति से हानि होगी। नई योजना बनेगी। कार्यप्रणाली में सुधार होगा। कार्यसिद्धि होगी, थकान रहेगी।
💮 आज का दिन सभी के लिए मंगलमय हो ।
।।शुभम भवतु ।।
🇮🇳🇮🇳 जयतु भारती 🚩🚩