Bihar Foods

Bihar Foods This is about Bihari Foods and Restuarants I left my home, parents before 15 years for better life. I had tasted lot of variety of all these states.

Visited lot of places, so many states(Karnataka, Tamilnadu, Gujrat, West Bengal, Maharastra, Rajasthan, Utter Pradesh, Haryana, Madhya Pradesh. I am big foodie so I like food for every almost every state. I had seen specialized restaurant which is known for places or states like Shravana Bhavan is known for Tamilnadu food. I am from Bihar and till date I had not seen any specialized restaurant w

hich is known for Bihar or Bihari Foods but today I had seen name of a restaurant which is claiming their specialization in Bihari Foods specially for Litti Chokha or Litti Chicken and they are claiming that Bihari Cuisine is not just Litti Chokha. I will update information about Bihar Foods and Restaurants where we will get Bihari Food.

18/07/2024

बिहार के लोगों का सबसे फेवरेट रेडीमेड फूड लिट्टी चोखा अचार ही नहीं बल्कि दही चुरा भी है। सीतामढी से लेकर मुंगेर , सारण से लेकर चंपारण तिरहुत से लेकर भागलपुर के बाजीकांचल तक कोसी कछार से लेकर सीमांचल मिथिलांचल तक दही चूड़ा का क्रेज जबरदस्त है । सुबह सवेरे बिहार के आदमी को आप खाने में दही चूरा लाल मिर्च का भरवा अचार दे दीजिए तो वह तृप्त हो जाता है। आपको बिहार के हर चौक चौराहे बाजार में दही चुरा की दुकान मिल जाएगी ग्राहक भी स्थाई है सुबह में आपको कहीं निकलना है घर के सदस्य सोए हुए हैं घर में दही है फिर किसी को जगाने की आवश्यकता नहीं है चुरा भिगो या दही डाल चीनी या गुड़ डाल मिर्च का अचार लिया खाकर तृप्त हो गए अगले कुछ घंटे के लिए। बिहार में सबसे उत्तम क्वालिटी की दही कोसी के इलाके में मिलता है कहा जाता है की दही इतनी उत्तम क्वालिटी की होती है जिसे आप गमछा में भी बांध सकते हैं। बड़े चारागाह होने के कारण उसे इलाके में दुधारू पशुओं के दूध में क्रीम की मात्रा ज्यादा होती है। भागलपुर और मोतिहारी के साथ ही साथ सीतामढी इलाके में कई विशिष्ट प्रकार का चूरा होता है जो आपकी भूख को कई गुना बढ़ा देता है वैसे अब हर जगह यह उपलब्ध है। आज बिहार के ग्रामीण इलाकों में आपके हाथ से ओखल में कूटा हुआ चुरा मिलता है जो थोड़ा सा कड़ा होता है और जल्दी पानी में डालने के बाद फूलता भी नहीं है। बिहार में दही चूड़ा का क्रेज इतना जबरदस्त है कि कोई भी शुभ कार्य दही चुरा के साथ ही शुरू होता है हालांकि मिथिलांचल और अंग प्रदेश में दही चुरा के साथ मछली भी परोसा जाता है जबकि उत्तर बिहार में मछली के साथ दूध दही का सेवन वर्जित होता है। बिहार के खानपान में दही चूड़ा बेहद फेमस है और लोगों की पसंद भी। स्वास्थ्य की दृष्टिकोण से भी यह काफी बेहतर होता है।

दही चूरा केवल बिहार में नहीं बल्कि हर बिहारी के घर खाया जाता है अगर उपलब्ध हो तो। समस्या चूरा मिलने कि है जो की बिहार, झारखंड के अलावा कही भी सही नहीं मिल पाता है। फिर भी इसका क्रेज बन हुआ है।

18/07/2024

बिहार न केवल अपनी ऐतिहासिक धरोहर और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां का भोजन भी पर्यटकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा है. हालांकि, आमतौर पर एक धारणा बन चुकी है कि बिहार में केवल लिट्टी चोखा ही खाने योग्य सबसे शानदार व्यंजन है. जबकि, असलियत में ऐसा है नहीं. क्योंकि, बिहार में एक से एक पकवान हैं जिसका स्वाद लाजवाब है. हम यह कह सकते हैं कि अन्य प्रसिद्ध आइटमों की जानकारी देश- विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहद कम होती है. ऐसे में इन बिहारी व्यंजनों को हमें एक बार जरूर जान लेना चाहिए.

लाजवाब होता है सत्तू पराठासत्तू पराठा एक पौष्टिक और स्वादिष्ट व्यंजन है, इसे चने के सत्तू से भरकर तवे पर पकाया जाता है. सत्तू पराठा के साथ अचार, दही, और हरी चटनी का स्वाद लाजवाब होता है. ठंड के मौसम में लोग खासकर सत्तू पराठा का स्वाद लेना पसंद करते हैं.

ठेकुआ में बसता है इमोशन ठेकुआ बिहार की शान है और एक पारंपरिक मिठाई है, जिसे खासतौर पर छठ पूजा के दौरान बनाया जाता है. इसे गेहूं के आटे, गुड़, और नारियल के मिश्रण से तैयार किया जाता है और घी अथवा तेल में छाना जाता है.

घुघनी माने लोकप्रिय चने की सब्जी है, जिसे विभिन्न प्रकार के मसालों के साथ पकाया जाता है. इसे पराठा या चावल के साथ परोसा जाता है. यह स्नैक के रूप में भी खाया जाता है. बिहार में अक्सर ट्रेनों में भी बेचने वाले आपको दिख जाएंगे.

दाल पीठा यानी देसी मोमोज दाल पीठा एक तरह का मोमोज ही है. कह सकते हैं कि ये मोमोज का पारंपरिक अवतार है. जिसे चावल के आटे से तैयार किया जाता है. इसमें दाल और मसालों को भरा जाता है और इसे उबालकर पकाया जाता है.

खानदानी ब्रेकफास्ट है दही चूड़ाचूड़ा-दही या दही चूड़ा एक विशेष पारंपरिक बिहारी नाश्ता है, चूड़ा और दही के साथ लोग मीठे में केले, मिठाई अथवा तिलकुट खाना भी पसंद करते हैं. इसके साथ ही कई लोग सब्जी भी खाते हैं. इसमें चीनी या गुड़ मिलाकर खाया जाता है. यह बेहद पौष्टिक के साथ साथ स्वादिष्ट भी होता है.

ठेठ देशी मिष्ठान है खाजा खाजा बिहार की प्रसिद्ध मिठाई है, जो बिहार के अलग अलग क्षेत्रों में बनाई जाती है. इसे मैदा और चीनी के सिरप से तैयार किया जाता है और तेल में तला जाता है. इसका कुरकुरा और मीठा स्वाद पर्यटकों को खूब भाता है.

इंडियन पैन केक है मालपुआ मालपुआ एक प्रकार का मीठा पैनकेक है, जिसे खासतौर पर होली और अन्य त्योहारों पर बनाया जाता है. इसे मैदा, दूध, और चीनी के घोल से तैयार किया जाता है और घी में तला जाता है.

परवल की मिठाई भी होती है लाज़वाबपरवल की मिठाई एक अनोखी और स्वादिष्ट मिठाई है, जिसे परवल के अंदर खोया और ड्राई फ्रूट्स भरकर बनाया जाता है. इसे चाशनी में डुबोकर तैयार किया जाता है और इसका स्वाद अद्भुत होता है.

शाम का स्नैक कदही का बैंगन कदही का बैंगन एक स्वादिष्ट और मसालेदार व्यंजन है, जिसे छोटे बैंगनों को मसालों में भरकर तवे पर पकाया जाता है. इसका अनूठा स्वाद और मसालेदार तासीर इसे बेहद लोकप्रिय बनाता है.

वर्ल्ड फेमस हो चुका है बिहार का लिट्टी-चोखालिट्टी-चोखा बिहार का सबसे प्रसिद्ध और लोकप्रिय व्यंजन है. यह चने के सत्तू से भरी हुई गेहूं की गोलियों से तैयार होता है, जिसे तंदूर या तवे पर पकाया जाता है. इसके साथ परोसा जाने वाला चोखा आलू, बैंगन और टमाटर से तैयार किया जाता है..🙏❤️

Best omelette of Delhi
10/09/2020

Best omelette of Delhi

One of the best evening snacks. Overnight bhigoya hua black chana, fir boiled with little bit of salt and water. This wi...
05/08/2019

One of the best evening snacks. Overnight bhigoya hua black chana, fir boiled with little bit of salt and water. This will make your evening full of energy. Try this even in morning breakfast or in evening snacks.

Healthy Bihari food

26/07/2019
23/06/2019

It's not mine but it is fantastic.

👍होइगै मोर धरोहर गायब
卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐卐

चम्पा और चमेली गायब ।
फुलवन से ऊ खुश्बू गायब ॥
छोट छोट चीनी के आगे ।
बडी बडी गुड भेली गायब ॥

सरिया मह से धेनू गायब ।
माठा मह से नैनू गायब ॥
बडी बडी राइसमिल चलिगै ।
काँडी जांत पहरुवा गायब

खेतन से भय बरही गायब ।
ताले से भय नरई गायब ॥
घरे घरे अब नलका गडिगा ।
धन्न कुँवा पनिहारिन गायब ॥

रैन ना बोलै झींगुर गायब ।
जँगल मह से तीतिर गायब ॥
जब से रोटावेटर चलिगा ।
खेते मह से चीखुर गायब ॥

सगरे कै ऊ पानी गायब ।
नानी कै कहानी गायब ॥
जब से मिक्सर विक्सर चलिगा ।
सिल बट्टा कै चटनी गायब ॥

नदियां से भय नइया गायब ।
नइया कै खेवइया गायब ॥
अब कपार चढि कूकुर बइठे ।
सरिया मह से गइया गायब ॥

बाइस्कोप कै दुनिया गायब ।
जँघिया कै नचवइया गायब ॥
जब से आर केस्ट्रा चलिगा ।
बिरहा और बिरहिया गायब ॥

पँछी महै मटरिया गायब ।
मोरवा और मोरिनिया गायब ॥
खपडा से अब लिंटर परिगा ।
आँगन से गौरैया गायब ॥

गन्ना कै रस गोरस गायब ।
सतुवा और चबइना गायब ॥
जब से कोकाकोला चलिगा ।
माठा कै पियवइया गायब ॥

माटी वाली हण्डी गायब ।
डिहवा पर कै झण्डी गायब ॥
जब से गैस सिलेण्डर चलिगा ।
चूल्हा पर से कण्डी गायब ॥

स्कूले कै दुद्धी गायब ।
पहिली वाली तख्ती गायब ॥
शिक्षा जब से बिजनेस बनिगा ।
बडे बडे कै बुद्धी गायब ॥

महुआ कै ऊ किसुली गायब ।
आमे कै ऊ जिबुली गायब ॥
लकडकट्ट कै चोरी बढिगै ।
हरियर पेड कै सिल्ली गायब ॥

मेघ ना बरसै पानी गायब ।
गँउवन कै जवानी गायब ॥
बाग उजड के महल खडा अब ।
बइलन कै जवानी गायब ॥

हर जुवाठ कै मुठिया गायब ।
बाबा जी कै कुटिया गायब ॥
मोबाइल से होय भजन अब ।
मँगलचार कै गितिया गायब ॥

धानी रँग कै चिरिया गायब ।
शादी ब्याह कै भिरिया गायब ॥
वाइफ और हसबेण्ड बने ।
पति वन्दन वाली तिरिया गायब ॥

समुन्दर से सूती गायब ।
बाँसे कै ऊ पूती गायब ॥
बोलबेटा बालम् अब चलिगा ।
धोती कुर्ता गमछा गायब. ॥

गोझिया कै ऊ मोडनी गायब ।
रसोइँया से बढनी गायब ॥
जब से जींस और टाप सँचरि गा ।
कांधे पर से ओढनी गायब

टिड्डा और टिटहरी गायब ।
पोखरा से भय सेहरी गायब ॥
जब से टीना टंकी चलिगै ।
माटी वाली डेहरी गायब ॥

कय चिंतन " साकेतपुरी अब ।
मन मा इहै विचार करैं ॥
आवै वाली पीढी कइसे जानी।
शिष्टाचार करै ॥
ओक्का बोक्का तीन तलोक्का,
फूट गयल बुढ़ऊ क हुक्का।
फगुआ कजरी कहाँ हेरायल,
अब त गांव क गांव चुड़ूक्का।।

नया जमाना; नयके लोग,
नया नया कुल फईलल रोग।
एक्के बात समझ में आवै,
जइसन करनी वइसन भोग।।

नई नई कुल फइलल पूजा,
नया नया कुल देबी देवता।
एक्कै घर में पांच ठो चूल्हा,
एक्कै घरे में पांच ठो नेवता।।

नउआ कउआ बार बनउवा,
कवनो घरे न फरसा झऊआ।
लगे पितरपख होय खोजाई,
खोजले मिलें न कुक्कुर कउआ।।

एहर पक्का ओहर पक्का,
जेहर देखा ओहर पक्का।
गांव क माटी महक हेराइल,
अंकल कहा कहा मत कक्का।।

कहाँ गयल कुल बंजर ऊसर,
लगत बा जइसे गांव ई दूसर।
जब से ई धनकुट्टि आइल,
कउनो घरे न ओखरी मूसर।।

कहाँ बैल क घुंघरू घण्टी,
कहाँ बा पुरवट अऊर इनारा।
कहां गइल पनघट क गोरी,
सूना सूना पनघट सारा।।

शहर गांव के घीव खियावै,
दाल शहर से गांव में आवै।
शहरन में महके बिरियानी,
कलुआ खाली धान ओसावै।।

गांव गली में अब त खाली,
राजनीती पर होले चर्चा।
अब ऊ होरहा कहाँ भुजाला,
कहाँ पिसाला नीमक मरचा।।

कबो कबो सोंचीला भाई,
अब ऊ दिन ना लौट के आई।
अब ना वइसे कोयल बोलिहैं,
वइसे ना महकी अमराई।।

18/06/2019

I spent more than 19 years in Delhi. Still I can't say I am Delhiites. Main reason is our food habits. We all can change our lifestyle but can't change our food style.

But everyone who is is far from their ancestors home, staying in cities like Delhi, Mumbai are not able to get their favourite food items. If getting, quality is big concern.

For me, I love sattu/chura/pickles and many more. List is long. Not only me, most of us carry our favourite food items from Bihar, whenever we go to Bihar. It is not so easy everytime, but we don't have other option.

It's my thought.....
I am curious to know your thoughts......

Further I will talk about some solution ......

16/11/2018

आज मैने मैथिली खाने के बारे मे पढा और एक लेखिका के बारे मे भी. मैं चाहता हूँ कि आप भी पढ़े .

http://cookwithtutu.com/index.php/mithila-cuisine/

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Delhi, New Delhi
Delhi
110088

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Tuesday 9am - 10pm
Wednesday 9am - 10pm
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Saturday 9am - 10pm
Sunday 9am - 10pm

Telephone

9999562239

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