27/12/2025
ज़िंदगी ना जाने कैसी हो गई है… 💔✍️
पता नहीं मेरा मन अक्सर क्यों इतना परेशान रहता है, कहने को तो मैं ठीक हूँ, हँस भी लेती हूँ, पर अंदर से खत्म हो गई हूँ। सब के बीच खुश भी रह लेती हूँ, पर हकीकत ये है अपने अंदर ही अंदर टूट कर, खुद को समझाते हुए, अपने उलझे मन को सुलझाते हुए, अब तो सबके सामने खुद को मजबूत दिखाते दिखाते थक सी गई हूँ। हर चीज़ सहन करने की जैसे आदत सी हो गई है, कोई छोड़ भी जाये जीवन के सफ़र में अकेला, तो दर्द तो बहुत होता है, पर मेरी आवाज़ नहीं निकलती मैं किसी को रोक लूँ… 💔✍️
कोई पूछे तो मैं ठीक हूँ बढ़िया हूँ, कहने की जैसे आदत सी हो गई। पता नहीं अब मुझको कोई अपना सा क्यों नहीं लगता, दिल ने जब भी किसी को अपना माना वही दिल तोड़ गया। अब मेरा मन किसी को कुछ कहने का भी नहीं करता, धीरे धीरे मुझको खुद के साथ अकेले रहने की आदत होती जा रही है…. 💔✍️🌹
अब तो मेरा मन मौन होता जा रहा है, जो नहीं चाहा कभी वही होता जा रहा है। कुछ समझ ही नहीं आ रहा है, ज़िंदगी मुझे कहाँ लेती जा रही है, बस आँखें बंद करके मैं ईश्वर के विश्वास पर चलती जा रही हूँ....