31/05/2017
*_पहली बार किसी विपक्ष द्वारा अक्षम्य कृत्य करने पर ग़ुस्सा नही, दर्द हो रहा है । केरल कांग्रेस ने केमरा के सामने गाय काटी । इस गुस्से को बेहद गुस्से में लिखा है ।_*
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*_शर्म, हया और देश धर्म, सब कुछ खूँटी पर टाँग गया । आज विपक्ष मर्यादा की,,,, सब सीमाएँ लाँघ गया ।_*
*_इतना पापी,, दुष्ट,, धूर्त कोई गंदा भी हो सकता है ? क्या कोई 'व्यक्ति-विरोध' में इतना अंधा भी हो सकता है ?_*
*_मत समझो गाय काटकर, तुमने विजय यात्रा रोकी है । कांग्रेसी ताबूत में तुमने,,,, कील आख़िरी ठोकी है ।_*
*_अय्याशी की पैदाइश हो, इस धरती पर पाप हो तुम । कुर्सी खातिर 'माँ' काटी है, मुगलो के भी बाप हो तुम ।_*
*_वैश्यावृति बंद हुई तो,,,, कैसे विरोध जताओगे ? बेटी-बहन को लेकर क्या तुम सड़कों पर आ जाओगे ?_*
*_जो घड़ा पाप का भरा हुआ था, तुमने स्वयं ही फोड़ दिया । औरंगजेब और बाबर, ग़जनी सबको पीछे छोड़ दिया ।_*
*_देश विरोधी बने हुए हो, कुछ भी ना सोचा तुमने । सावरकर के चित्रों को,,,, दीवारों से नौंचा तुमने ।_*
*_लहू उबाले मार मारकर,, उस दिन मेरा खौला था । जिस दिन "भगवा आतंकी" संसद में तुमने बोला था ।_*
*_शाप लगेगा गौ माता का,,, देश तुम्हें धिक्कारेगा । मुरली वाला कृष्ण तुम्हें तड़पा-तड़पाकर मारेगा ।_*
*_दो साल के बाद ये जनता सड़कों पर आ जाएगी । अबकी बार तुम्हारी चालीस, सीटें भी खा जाएगी ।_*