13/11/2023
क्योंकि, मैं एक लड़का हूं
रख ज़िम्मेदारियों का बोझ सर पर
घर से मैं हर रोज़ निकलता हूं
दर्द होता है फिर भी उफ्फ़ तक न करता हूं
सहता हूं हर इल्ज़ामों को
घरवालों की फटकारों को
रोना आता है, खुलकर रो भी नहीं सकता हूं
क्योंकि, मैं एक लड़का हूं ।।१।।
सिखाया बचपन से है मुझको
घरवालों और रिश्तेदारों ने
सब कुछ सहना पड़ता है
रोते हुए भी हंसना पड़ता है
डरता भी हूं कभी-कभी
जताने से भी अक़्सर बचता हूं
क्योंकि, मैं एक लड़का हूं ।।२।।
परिवार की सुनने की आदत है पड़ गयी
अपने दिल की भी नहीं सुन पाता हूं
पूरी करते-करते ख़्वाहिश सबकी
चाहत से भी अपनी रह जाता हूं
एक कदम उठाने से पहले भी
सौ बार सोचता रहता हूं
क्योंकि, मैं एक लड़का हूं ।।३।।
न खुलकर अब पापा बोल पाते
न मम्मी अच्छे से समझाती है
हो गया हूं समझदार सोचकर
शायद कहते-कहते रुक जाती है
उठा लिया घर सारा ख़ुद पर
भूल अपना वजूद बैठा हूं
क्योंकि, मैं एक लड़का हूं ।।४।।