Tanturasti ka raj

Tanturasti ka raj Tandurusti ka Raj

09/02/2026
तंदुरुस्ती का राज अंकुरित पोस्टिक नास्ता अपराजिता क्या है?अपराजिता एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है। इसे आयुर्वेद में बहुत पवित...
02/02/2026

तंदुरुस्ती का राज अंकुरित पोस्टिक नास्ता
अपराजिता क्या है?
अपराजिता एक प्रसिद्ध औषधीय पौधा है। इसे आयुर्वेद में बहुत पवित्र और शक्तिवर्धक माना गया है। इसके फूल नीले या सफ़ेद रंग के होते हैं। शास्त्रों में इसे मेध्या रसायन कहा गया है, यानी यह बुद्धि, स्मरण शक्ति और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाने वाला पौधा है।
🌿 अपराजिता के आयुर्वेदिक गुण
आयुर्वेद के अनुसार अपराजिता के गुण इस प्रकार हैं-
रस (स्वाद): कड़वा, कसैला, तीखा
गुण: हल्का, शुष्क
वीर्य: शीतल (ठंडक देने वाला)
विपाक: कटु
दोष प्रभाव: कफ और पित्त दोष को शांत करता है।
यह शरीर को शुद्ध करता है, सूजन कम करता है और तंत्रिका तंत्र को मज़बूत करता है।
💁‍♀️ बालों के लिए अपराजिता के लाभ
अपराजिता बालों के लिए वरदान है ।
* बालों की जड़ों को मज़बूती देता है।
* बाल झड़ने की समस्या को कम करता है।
* सिर की त्वचा में रक्त संचार बढ़ाता है।
* समय से पहले सफ़ेद होने से बचाने में सहायक।
* बालों में प्राकृतिक चमक लाता है।
* रूसी और खुजली में लाभकारी।
👉 अपराजिता का काढ़ा या तेल सिर में लगाने से बाल घने और स्वस्थ बनते हैं।
💆‍♀️ त्वचा के लिए अपराजिता के लाभ
अपराजिता त्वचा के लिए भी कमाल की औषधि है ।
* चेहरे पर प्राकृतिक निखार लाता है।
* मुहाँसे और दाग-धब्बे कम करने में सहायक।
* त्वचा की सूजन और जलन को शांत करता है।
* त्वचा को भीतर से शुद्ध करता है।
* झुर्रियों और बेजान त्वचा में लाभकारी।
👉 अपराजिता का लेप लगाने से त्वचा साफ़ और चमकदार बनती है।
🍵 अपराजिता का सेवन कैसे करें?
अपराजिता को कई तरीकों से उपयोग में लिया जा सकता है-
1️⃣ अपराजिता का काढ़ा
सूखे फूलों को पानी में उबालकर काढ़ा बनाकर पी सकते हैं।
यह मानसिक शांति और त्वचा शुद्धि के लिए लाभकारी है।
2️⃣ अपराजिता चूर्ण
सूखे फूलों या जड़ों का चूर्ण बनाकर
½ से 1 चम्मच गुनगुने पानी या शहद के साथ लें।
3️⃣ बाहरी उपयोग
फूलों या पत्तियों का लेप बनाकर
बालों या चेहरे पर लगाया जा सकता है।
⚠️ हमेशा कम मात्रा से शुरुआत करें।
👩‍🦱 कौन अपराजिता का सेवन कर सकता है?
* विद्यार्थी और पढ़ाई करने वाले बच्चे।
* मानसिक तनाव या चिंता से ग्रस्त लोग।
* बालों और त्वचा की समस्या वाले लोग।
* स्मरण शक्ति बढ़ाने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति।
🚫 कौन अपराजिता का सेवन नहीं करे?
* गर्भवती महिलाएँ (वैद्य की सलाह के बिना)।
* स्तनपान कराने वाली महिलाएँ।
* बहुत छोटे बच्चे।
* गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्ति।
* किसी भी औषधि से एलर्जी वाले लोग
ऐसे लोग सेवन से पहले आयुर्वेद चिकित्सक से सलाह लें।
किस आयुर्वेदिक ग्रंथ में अपराजिता का उल्लेख है?
अपराजिता का वर्णन निम्नलिखित आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है-
📖 भावप्रकाश निघण्टु
📖 कैैयदेव निघण्टु
📖 सुश्रुत संहिता
इन ग्रंथों में अपराजिता को-
* मेध्या (बुद्धिवर्धक), विषनाशक, सूजन नाशक और त्रिदोष संतुलक बताया गया है।
🌼 निष्कर्ष (फाइनल बात)
अपराजिता एक अद्भुत आयुर्वेदिक औषधि है जो-
* दिमाग़ को तेज़ करती है।
* बालों और त्वचा को सुंदर बनाती है।
* शरीर को भीतर से शुद्ध करती है।
* मानसिक शांति देती है।
सावधानी -
👉 प्राकृतिक चीज़ भी सही मात्रा और सही तरीके से ही लाभ देती है।











🌿 गिलोय क्या है? (What is Giloy).... स्वस्थ भारत गिलोय का आयुर्वेदिक नाम गुडूची (Guduchi) है।यह एक औषधीय बेल है, जिसे आय...
31/01/2026

🌿 गिलोय क्या है? (What is Giloy).... स्वस्थ भारत

गिलोय का आयुर्वेदिक नाम गुडूची (Guduchi) है।
यह एक औषधीय बेल है, जिसे आयुर्वेद में “अमृता” कहा गया है —
अर्थात अमर करने वाली 🌱

👉 क्योंकि गिलोय शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) को मज़बूत बनाती है।

🌿 गिलोय के आयुर्वेदिक गुण (Ayurvedic Properties)

आयुर्वेद के अनुसार गिलोय में ये प्रमुख गुण पाए जाते हैं 👇

🟢 रस (Taste): तिक्त (कड़वा), कषाय
🔥 वीर्य: उष्ण
⚖️ विपाक: मधुर

🧘‍♀️ दोषों पर प्रभाव

वात 🟢 – संतुलित करता है

पित्त 🔵 – शांत करता है

कफ 🟡 – कम करता है

🌿 गिलोय के फायदे (Health Benefits)

गिलोय सच में एक Natural Multitasker है 😎👇

💪 Immunity Booster

बार-बार बीमार पड़ने से बचाव

सर्दी-खांसी, वायरल इंफेक्शन में मदद

🔥 बुखार में उपयोगी

डेंगू, मलेरिया, वायरल फीवर में सहायक

🩸 खून को साफ करता है

Skin problems

पिंपल्स, फोड़े-फुंसी

🧠 Digestion & Metabolism

पाचन सुधारे

भूख बढ़ाए

🌸 Skin & Hair Benefits

Skin में natural glow ✨

बालों की जड़ों को मज़बूत बनाए

🩺 Diabetes में सहायक

Blood sugar को संतुलित करने में मदद

🌿 गिलोय किसे लेनी चाहिए?

✔️ जिनकी immunity कमजोर है
✔️ जिन्हें बार-बार बुखार या इंफेक्शन होता है
✔️ जिनको skin problems रहती हैं
✔️ जिनका digestion slow है
✔️ जो मौसम बदलते ही बीमार पड़ जाते हैं

🚫 गिलोय किसे नहीं लेनी चाहिए?

⚠️ ध्यान दें bestie 👀

❌ गर्भवती महिलाएं (Doctor की सलाह के बिना नहीं)
❌ Auto-immune disease वाले लोग
❌ बहुत ज़्यादा दुबले-पतले या अत्यधिक कमजोर लोग
❌ Low BP वाले लोग (सावधानी ज़रूरी)

🌿 गिलोय की सही मात्रा (Dosage)

आयुर्वेद के अनुसार 👇

🥤 गिलोय रस: 10–20 ml
🌿 गिलोय चूर्ण: 1–3 ग्राम
☕ गिलोय काढ़ा: 1 कप

👉 ज़्यादा मात्रा नुकसान कर सकती है
“More is not always better” — ये ज़रूर याद रखें ⚠️

🌿 गिलोय कैसे लें? (How to Use)

🥤 गिलोय रस

सुबह खाली पेट

गुनगुने पानी के साथ

☕ गिलोय काढ़ा

गिलोय की डंडी उबालकर

बुखार और immunity के लिए best

🌿 गिलोय चूर्ण

शहद या गुनगुने पानी के साथ

📚 आयुर्वेदिक ग्रंथों में गिलोय

गिलोय का उल्लेख इन प्रसिद्ध ग्रंथों में मिलता है 👇

📖 चरक संहिता
📖 सुश्रुत संहिता
📖 भावप्रकाश निघंटु
📖 धन्वंतरि निघंटु

👉 इन ग्रंथों में गिलोय को
ज्वरनाशक, रसायन और बलवर्धक बताया गया है।

✨ निष्कर्ष (Conclusion)

🌿 गिलोय = Nature का Immunity Shield

लेकिन याद रखें —
✔️ सही मात्रा
✔️ सही तरीका
✔️ ज़रूरत के अनुसार उपयोग

तभी गिलोय देगा पूरा फायदा 💚










आजकल की व्यस्त जीवन शैली में अनियमित खान -पान के चलते लोगों में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता दिनों-दिन घट रही है। ...
31/01/2026

आजकल की व्यस्त जीवन शैली में अनियमित खान -पान के चलते लोगों में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता दिनों-दिन घट रही है। ऐसे में हम यदि जरा भी अपने अनमोल शरीर के लिए ध्यान दे और नियमित जीवन चर्या से सिर्फ पन्द्रह मिनट का समय निकाल कर इस प्रयोग को कर ले तो आपको कई बीमारियों से निजात मिल जायेगी और जो स्वस्थ लोग है उनको भी डॉक्टर का मुंह नहीं देखना पड़ेगा,क्योंकि जीवन का सुख निरोगी काया में है।
#ज्वारे_का_रस

गंभीर रोगों से जूझते रोगियों को प्रतिदिन चार बड़े गिलास भरकर ज्वारों का रस दिया जाता है।

यह रोगी और स्वस्थ दोनों ले सकते हैं जो अत्यंत गुणकारी है।

कैंसर में गेहूँ के ज्वारे का उपयोग

गेहूँ के दाने बोने पर जो एक ही पत्ता उगकर ऊपर आता है उसे ज्वारा कहा जाता है। नवरात्रि आदि उत्सवों में यह घर-घर में छोटे-छोटे मिट्टी के पात्रों में मिट्टी डालकर बोया जाता है। ये गेहूँ के ज्वारे का रस, प्रकृति के गर्भ में छिपी औषधियों के अक्षय भंडार में से मानव को प्राप्त एक अनुपम भेंट है।

शरीर के आरोग्यार्थ यह रस इतना अधिक उपयोगी सिद्ध हुआ है कि विदेशी जीववैज्ञानिकों ने इसे 'हरा रक्त' (Green Blood) कहकर सम्मानित किया है। डॉ. एन. विगमोर नामक एक विदेशी महिला ने गेहूँ के कोमल ज्वारों के रस से अनेक असाध्य रोगों को मिटाने के सफल प्रयोग किये हैं।

गेहूँ के ज्वारों के रस में रोगों के उन्मूलन की एक विचित्र शक्ति विद्यमान है। शरीर के लिए यह एक शक्तिशाली टॉनिक है।

इसमें प्राकृतिक रूप से कार्बोहाईड्रेट आदि सभी विटामिन, क्षार एवं श्रेष्ठ प्रोटीन उपस्थित हैं। इसके सेवन से असंख्य लोगों को विभिन्न प्रकार के रोगों से मुक्ति मिली है।

कैन्सर, मूत्राशय की पथरी, हृदयरोग, लीवर, डायबिटीज, पायरिया एवं दाँत के अन्य रोग, पीलिया, लकवा, दमा, पेट दुखना, पाचन क्रिया की दुर्बलता, अपच, गैस, विटामिन ए, बी आदि के अभावोत्पन्न रोग, जोड़ों में सूजन, गठिया, संधिशोथ, त्वचासंवेदनशीलता (स्किन एलर्जी) सम्बन्धी बारह वर्ष पुराने रोग, आँखों का दौर्बल्य, केशों का श्वेत होकर झड़ जाना, चोट लगे घाव तथा जली त्वचा सम्बन्धी सभी रोगों में इससे आशातीत लाभ मिलता है।

हजारों रोगियों एवं निरोगियों ने भी अपनी दैनिक खुराकों में बिना किसी प्रकार के हेर-फेर किये गेहूँ के ज्वारों के रस से बहुत थोड़े समय में चमत्कारिक लाभ प्राप्त किये हैं।

🌿🌿गेहूँ के ज्वारे उगाने की विधि🌿🌿

आप मिट्टी के नये गमले लें। देशी खाद और मिट्टी भरकर गेहूं बोयें।धूप अधिक या सीधी न लग पाये इसका ध्यान रखें।

आवश्यकतानुसार कम या अधिक गमलों में उगायें। इस प्रक्रिया में भूलकर भी प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग कदापि न करें।

प्रतिदिन व्यक्ति के उपयोग अनुसार एक, दो या अधिक गमलों में गेहूँ बोते रहें। मध्याह्न के सूर्य की सख्त धूप न लगे परन्तु प्रातः अथवा सायंकाल का मंद ताप लगे ऐसे स्थान में गमलों को रखें।

लगभग आठ-दस दिन नें गेहूँ के ज्वारे पाँच से सात इंच तक ऊँचे हो जायेंगे। ऐसे ज्वारों में अधिक से अधिक गुण होते हैं। ज्यो-ज्यों ज्वारे सात इंच से अधिक बड़े होते जायेंगे त्यों-त्यों उनके गुण कम होते जायेंगे। अतः उनका पूरा-पूरा लाभ लेने के लिए सात इंच तक बड़े होते ही उनका उपयोग कर लेना चाहिए।

ज्वारों की मिट्टी के धरातल से कैंची द्वारा काट लें अथवा उन्हें समूल खींचकर उपयोग में ले सकते हैं। खाली हो चुके गमलों में फिर से गेहूँ बो दीजिये। इस प्रकार प्रत्येक दिन गेहूँ बोना चालू रखें।

🧋ज्वारों का रस बनाने की विधि

ज्वारे काटते ही तुरन्त धो डालें। धोते ही उन्हें कूटें। कूटते ही उन्हें कपड़े से छान लें। इसी प्रकार उसी ज्वारे को तीन बार कूट-कूट कर रस निकालने से अधिकाधिक रस प्राप्त होगा।

चटनी बनाने अथवा रस निकालने की मशीनों आदि से भी रस निकाला जा सकता है। रस को निकालने के बाद विलम्ब किये बिना तुरन्त ही उसे धीरे-धीरे पीयें क्योंकि उसका गुण प्रतिक्षण घटने लगता है और तीन घंटे में तो उसमें से पोषक तत्व ही नष्ट हो जाता है। प्रातःकाल खाली पेट यह रस पीने से अधिक लाभ होता है।

दिन में किसी भी समय ज्वारों का रस पिया जा सकता है। परन्तु रस लेने के आधा घंटा पहले और लेने के आधे घंटे बाद तक कुछ भी खाना-पीना न चाहिए।

आरंभ में कइयों को यह रस पीने के बाद उबकाई आती है याउलटी हो जाती है अथवा सर्दी हो जाती है, परंतु इससे घबराना न चाहिए।

शरीर में कितने ही विष एकत्रित हो चुके हैं यह प्रतिक्रिया इसकी निशानी है। सर्दी, दस्त अथवा उलटी होने से शरीर में एकत्रित हुए वे विष निकल जायेंगे।

ज्वारों का रस निकालते समय मधु, अदरक, नागरबेल के पान (खाने के पान) भी डाले जा सकते हैं।

इससे स्वाद और गुण का वर्धन होगा और उबकाई नहीं आयेगी। विशेषतया यह बात ध्यान में रख लें कि ज्वारों के रस में नमक अथवा नींबू का रस तो कदापि न डालें।

रस निकालने की सुविधा न हो तो ज्वारे चबाकर भी खाये जा सकते हैं। इससे दाँत मसूढ़े मजबूत होंगे। मुख से यदि दुर्गन्ध आती हो तो दिन में तीन बार थोड़े-थोड़े ज्वारे चबाने से दूर हो जाती है। दिन में दो या तीन बार ज्वारों का रस लीजिये।
सस्ता और सर्वोत्तम

ज्वारों का रस दूध, दही और मांस से अनेक गुना अधिक गुणकारी और सस्ता है। दूध और मांस में भी जो नहीं है उससे अधिक इस ज्वारे के रस में है।

गरीबों के लिए यह ईश्वरीय आशीर्वाद है। नवजात शिशु से लेकर घर के छोटे-बड़े,वृद्ध सभी ज्वारे के रस का सेवन कर सकते हैं। नवजात शिशु को प्रतिदिन पाँच बूँद दी जा सकती है।

ज्वारे के रस में लगभग समस्त क्षार और विटामिन उपलब्ध हैं। इसी कारण से शरीर मे जो कुछ भी अभाव हो उसकी पूर्ति ज्वारे के रस द्वारा आश्चर्यजनक रूप से हो जाती है।

इसके द्वारा प्रत्येक ऋतु में नियमित रूप से प्राणवायु, खनिज, विटामिन, क्षार और शरीरविज्ञान में बताये गये कोषों को जीवित रखने से लिए आवश्यक सभी तत्त्व प्राप्त किये जा सकते हैं।

ज्वारों के रस के सेवन के अनेक प्रयोग किये गये हैं। कैंसर जैसे असाध्य रोग मिटे हैं। शरीर सुंदर, स्वस्थ और पुष्ट होते पाये गये हैं।
🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿🌿

🌿 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ – शुगर कंट्रोल व सेहत के लिए 🌿डायबिटीज, कमजोर पाचन और कम इम्युनिटी से परेशान हैं?आयुर्वेद में ...
22/01/2026

🌿 आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ – शुगर कंट्रोल व सेहत के लिए 🌿
डायबिटीज, कमजोर पाचन और कम इम्युनिटी से परेशान हैं?
आयुर्वेद में बताई गई ये प्राकृतिक जड़ी-बूटियाँ शरीर को अंदर से मजबूत बनाती हैं 👇

✅ गुडमार – मीठा खाने की क्रेविंग कम करे
✅ करेला साबुत – ब्लड शुगर संतुलित रखे
✅ निंबोली – शरीर को डिटॉक्स करे
✅ जामुन गुठली – इंसुलिन को सपोर्ट दे
✅ अंबा हल्दी – सूजन व इंफेक्शन से बचाए
✅ बेलपत्र – पाचन तंत्र दुरुस्त करे
✅ विजयसार – शुगर कंट्रोल में असरदार
✅ गिलोय – इम्युनिटी बढ़ाए
✅ मेथी दाना – शुगर व कोलेस्ट्रॉल संतुलित रखे
✅ ममेइजा – डाइजेशन को मजबूत करे
✅ सौंफ – पेट को ठंडक दे
✅ पनीर डोडा – डायबिटीज में उपयोगी
✅ अजवाइन – गैस व अपच से राहत
✅ नेपाली चिरायता – लीवर मजबूत करे
✅ इंद्रायण फल – शुगर लेवल घटाने में सहायक

🌿 जड़ी-बूटियों के फायदे:

1. गुडमार
मीठा खाने की इच्छा कम करता है
ब्लड शुगर कंट्रोल में सहायक
डायबिटीज में उपयोगी

2. करेला साबुत
रक्त शर्करा संतुलित रखता है
पाचन सुधारता है
शरीर को डिटॉक्स करता है

3. निंबोली (नीम बीज)
खून को साफ करती है
संक्रमण से बचाव
त्वचा रोगों में लाभकारी

4. जामुन गुठली
इंसुलिन को सपोर्ट देती है
शुगर लेवल नियंत्रित
बार-बार पेशाब की समस्या में लाभ

5. अंबा हल्दी
सूजन और दर्द कम करती है
इम्युनिटी बढ़ाती है
संक्रमण से बचाव

6. बेलपत्र
पाचन तंत्र मजबूत करता है
गैस, अपच में लाभ
मधुमेह में सहायक

7. विजयसार
ब्लड शुगर नियंत्रित करता है
अग्न्याशय (Pancreas) को मजबूत करता है
डायबिटीज में प्रसिद्ध जड़ी-बूटी

8. गिलोय
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है
बुखार और कमजोरी में लाभ
खून साफ करता है

9. मेथी दाना
शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित
पाचन ठीक करता है
वजन घटाने में सहायक

10. ममेइजा / ममेझवा
पाचन शक्ति बढ़ाता है
लीवर को मजबूत करता है
भूख बढ़ाने में सहायक

11. सौंफ
पेट को ठंडक देती है
गैस, जलन और बदहजमी में लाभ
मुंह की दुर्गंध दूर करती है

12. पनीर डोडा
डायबिटीज में असरदार
शरीर की कमजोरी दूर करता है
तंत्रिका तंत्र को शांत करता है

13. अजवाइन
गैस और अपच में तुरंत राहत
पेट दर्द में लाभ
मेटाबॉलिज्म बढ़ाती है
14. नेपाली चिरायता

लीवर को मजबूत करता है
रक्त शुद्धि में सहायक
बुखार और शुगर में उपयोगी

15. इंद्रायण फल
शुगर लेवल घटाने में सहायक
शरीर की सूजन कम करता है
मात्रा अधिक होने पर हानिकारक हो सकता है

⚠️ महत्वपूर्ण विशेषकर डायबिटीज या अन्य रोगों में

19/12/2025

तंदुरुस्ती का राज अंकुरित पोस्टिक नास्ता
केनरा बैंक के सामने पन्ना रोड़ छतरपुर

03/11/2025

#अंकुरित #पारिजात #पुनरनवा #अश्वगंधा #बीज

03/11/2025

#हल्दी #अंकुरित #पुनरनवा #पारिजात #बीज #हड़जोड़ #शिवलिंगी #गटान #अश्वगंधा

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