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31/01/2024

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#सम्पूर्ण दर्शन श्री कुबेर भण्डारी जी | ये नही देखा तो...... Dev Darshan | Aone Bhakti Darshan

श्री कुबेर भण्डारी का मंदिर माता रेवा नदी के पवित्र तट पर स्थापित है। बड़ौदा के करनाड़ी में महादेव साक्षात कुबेर भण्डारी के नाम से विराजित हैं। सम्पूर्ण मंदिर के गुंबद में कांच की नक्काशी की गई है। विभिन्न रंगों से कांच चित्रकारी का उपयोग करके भगवान के रूपों को सुसज्जित किया गया है। मंदिर में सभी भगवान के चित्रों को दर्शाया गया है। दीवारों पर की गई कलाकृति मंदिर के इतिहास को बयां करती हैं।

कुबेर भण्डारी मंदिर का इतिहास:-

श्री कुबेर भण्डारी से जुड़ी कई पौराणिक कहानियां है, बात उस समय की है जब सृष्टि के सर्वदेव ब्रम्हाजी के प्रपौत्र कुबेर थे, जब वे बड़े हुए उनके दादा पुलस्त्य ने गद्दी सहित सम्पूर्ण राजभर प्रपौत्र कुबेर को सौंप दिया। रावण को यह बात रास नहीं आई राजपाठ पाने के लिए घोर तप किया। रावण की तपस्या से देवाधि देव महादेव ने प्रसन्न होकर वरदान दिया। भोलेनाथ के वरदान से रावण ने श्री कुबेर को परास्त कर कुबेर भण्डारी से सारी संपत्ति छीन ली। ऐसी परिस्थिति में नारद मुनि ने श्री कुबेर भण्डारी को करनाडी जाकर तप करने की सलाह दी।
तत पश्चात कठोर तप करके श्री कुबेर ने महादेव को प्रसन्न कर लिया। और कुबेर भण्डारी को स्वर्ग की समग्र संपत्ति का खजांची बना दिया गया। श्री कुबेर भण्डारी की पूंजी भण्डारी के स्वरूप पूजा की जाने लगी। अहंकारी रावण पुष्पक विमान लेकर कुबेर भण्डारी के पीछे गए। ऐसी परिस्थिति में श्री कुबेर ने विघ्नेशवरी माता अम्बा की आराधना करते हुए माता ने उनका रक्षण किया। इसलिए आज भी कुबेर भण्डारी मंदिर में माता अम्बा की प्रतिमा को एक अलग स्थान दिया गया है। कुबेर मंदिर की विशेषता कहा जाए या महत्व लेकिन मंदिर परिसर में प्रवेश करते ही परम शांति का अनुभव होता है। महादेव के वरदान से श्री कुबेरभण्डारी की पूजा आज पूरे विश्व में की जाती है।

पांच अमावस निरंतर मंदिर में दर्शन करने से,

भक्तों की ऐसी मान्यता है पांच अमावस निरंतर मंदिर में दर्शन करने से कुबेर भण्डारी के स्वरूप में विराजित भोलेनाथ और मां जगदंबा की कृपा से सभी मन्नतें पूर्ण होती हैं। सदियों से चली आ रही एक प्रथा आज भी प्रचलित है, जैसे मंदिर की पूजा हो, नए कार्य का उद्दघाटन हो या अन्य शुभ कार्य सभी के अंत में मंत्र पुष्पांजलि में श्री कुबेर भण्डारी का नाम अवश्य लिया जाता है। मंदिर में एक दिव्य शिवलिंग भी स्थापित है कुबेर भण्डारी के साथ शिवलिंग की भी पूजा की जाती है। जब कुबेर भण्डारी को आभूषण और गहनों से सुसज्जित किया जाता है। मनमोहक प्रतिमा भक्तों का ध्यान केंद्रित करती है। आने वाले सभी दर्शनार्थी सुख समृद्धि की मनोकामना करते हैं। मंदिर के परिसर में एक पीपल का वृक्ष है, वृक्ष की परिक्रमा करना अनिवार्य है।

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मध्यप्रदेश के जिले चित्रकूट से एक रहस्य्मयी नदी बहती है। जो खुद में कई राज़, किस्से और कई बरसों पुराना इतिहास छुपाए बैठी है। यूपी के ही राम घाट से लगभग 18 किमी. दूर विंध्य पहाड़ियों के पन्ना श्रेणी में एक गुप्त गुफा है। जिसे गुप्त गोदावरी के नाम से जाना जाता है। इस जगह को यूपी के सबसे दिलचस्प स्थानों में गिना जाता है। इस जगह का अपना आध्यात्मिक महत्व है। साथ ही कुछ प्राकृतिक तौर पर चौकाने वाली रहस्यमयी चीज़े भी यहां देखने को मिलती है। चित्रकूट के अन्य सभी पर्यटन स्थलों की तरह इसका भी अपना एक पौराणिक इतिहास है।
गुप्त गोदावरी गफाएँ, पर्यटकों के लिए सबसे आकर्षण का केंद्र हैं। गुप्त गोदावरी में दो रहस्य्मयी गुफाएं भी है। जिनमे से एक गुफा बड़ी और दूसरी गुफा उससे छोटी लेकिन लम्बी है। जब हम बड़ी गुफा में घुसते हैं तो हमें वहां बहुत ख़ामोशी महसूस होगी। इस गुफा में हमें पानी नहीं मिलेगा। जैसे-जैसे हम गुफा की आखिर में पहुंचेंगे, ख़ामोशी और सन्नाटा और भी बढ़ता जाएगा। गुफा के आखिरी में हमे एक तालाब मिलेगा। दूसरी गुफा में घुसने पर हमें गुफा में पानी मिलेगा। जब आप गुफाओं को गौर से देखेंगे तो वह आपको और भी ज़्यादा विचित्र लगेंगी। इन गुफाओं को कई सालों पहले प्रकृति ने अपने चमत्कार से बनाया है। जैसे-जैसे हम अंदर जाते जायेंगे, पानी हमारे घुटनों तक आ जायेगा। हमें अंदर एक अलग तरह का ही रोमांच महसूस होगा। गुफा में घूमने पर हमारे पैरों को जहां पानी नहीं है, वहां अभी पानी का एहसास होगा। जिसके पीछे क्या राज़ है, किसी को नहीं पता।
हिंदू पौराणिक महाकाव्य, रामायण में बताया गया कि भगवान राम और भगवान लक्ष्मण 14 साल के वनवास के दौरान कुछ समय के लिए इस गुफा में रुके थे। और एक दरबार भी लगाया था। इतिहासकारों के अनुसार, गुफा के भीतर की चट्टानों से गहरी नदी के रूप में उभरती हुई गोदावरी नदी नीचे एक और गुफा में बहती है और फिर पहाड़ो में जाकर गायब हो जाती है। बाद में पानी को विशाल चट्टान की छत से बाहर निकलते हुए देखा जाता है। कहा जाता है कि जहां से पानी निकलता है, वह दानव मयंक का अवशेष है। पुरानी कथाओं में कहा जाता है कि जब माता सीता नहा रही थी तब इसी राक्षस ने सीता माँ के कपडे चुराने की कोशिश की थी। तब दानव मयंक के इस हीन काम के लिए लक्ष्मण ने दानव को मौत के घाट उतार दिया था।

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