05/08/2026
Shayari ✍️✍️
ख़्वाहिशें तुमसे मिलने की,
अब भी वैसी ही हैं...
बस तुम तक पहुँचने वाले
सारे रास्ते ख़ामोश पड़े हैं।
चले आते अगर तुम,
तो यह गुलशन फिर महक उठता...
बहारें कब किसी के इंतज़ार में
उम्र भर ठहरी रहती हैं।
सावन हर बरस
अपनी भीगी हुई दस्तक लेकर आता है,
मगर इस बार भी
तुम्हारे क़दमों की आहट साथ नहीं लाता।
भीगता तो बदन भी है,
मगर उससे क्या होता है...
असल में तो हर बूँद
दिल के सूखे आँगन पर गिरती है,
और तुम्हारी कमी
और गहरी कर जाती है।
तेरे मिलने की सरगोशियाँ
अब सिर्फ़ यादों में सुनाई देती हैं,
जैसे कोई अधूरा ख़्वाब
नींद के किनारे बैठा रो रहा हो।
आ जाओ न...
अगर लौट सकते हो तो लौट आओ...
देखो,
बारिश आज भी बरस रही है...
फ़र्क़ बस इतना है—
पहले यह हमें मिलाने आती थी,
अब हर फुहार
तुम्हारे न होने का एहसास
और भी गहरा कर जाती है...!!
....... ✍️