13/08/2026
बैराठ का रहस्यमयी सती स्थल!
बैराठ की धरती सिर्फ महाभारत और प्राचीन इतिहास के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि यहाँ आज भी कई ऐसे पुरातात्विक निशान मौजूद हैं, जो बीते सैकड़ों वर्षों की सामाजिक और धार्मिक परंपराओं की कहानी सुनाते हैं।
भीम जी की डूंगरी के पूर्व दिशा में स्थित यह क्षेत्र लंबे समय तक बैराठ का श्मशान स्थल रहा। यहाँ बनी स्मृति-छतरियाँ और पत्थरों पर उत्कीर्ण अभिलेख उस दौर के परिवारों, मृत्यु-संस्कारों और सती परंपरा से जुड़े इतिहास की ओर संकेत करते हैं।
पुरातात्विक सर्वेक्षण के दौरान यहाँ बड़ी संख्या में छतरियाँ मिलने का उल्लेख मिलता है। इनमें कुछ छतरियों पर घुड़सवार योद्धाओं और स्त्रियों की आकृतियाँ भी दिखाई देती हैं, जबकि कुछ स्मारक सती हुई स्त्रियों की स्मृति से जुड़े प्रतीत होते हैं।
लेकिन इस कहानी का सबसे रोचक हिस्सा है एक प्राचीन अभिलेख…
जिसकी शुरुआत होती है—
“ॐ राम सत्य है…”
अभिलेख में संवत् 1743 और एक परिवार से जुड़ी स्मृति का उल्लेख मिलता है। इसी अभिलेख से पापड़ी गाँव और उस समय के जागीरदारों से जुड़ी एक दिलचस्प ऐतिहासिक कड़ी भी सामने आती है।
कौन थे वे लोग?
किसकी स्मृति में यह छतरी बनाई गई थी?
पत्थर पर दर्ज उस अभिलेख में क्या लिखा है?
और पापड़ी गाँव की कहानी इससे कैसे जुड़ती है?
👉 इस Reel को अंत तक जरूर देखें… क्योंकि बैराठ के इन पत्थरों में इतिहास आज भी सांस लेता है।
हमारी धरोहर | इतिहास जो हमें जोड़ता है… 🏛️
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