59 Asr Kulcha Bunker

59 Asr Kulcha Bunker We Serve 59 Type Of Special Amritsari Kulcha With Authentic अमृतसरी छोले. च? 59 TYPES OF SPECIAL AMRITSARI KULCHE CHOLLE......!!!

30/08/2020

आप सभी भक्तजनों से अनुरोध है कि ईस धार्मिक कार्य मे अपना यथाशक्ति योगदान करे ।
अगर आप अपनी कुंडली विश्लेषण या हस्तरेखा विश्लेषण कराना चाहते है या कोई पूजन, कर्मकांड आदि करवाना चाहते है तो संपर्क करे :- 7973281500, 9878875654

29/08/2020
29/08/2020

|| #दो_विवाह_कब_होते_है_या_दूसरा_विवाह?||

किसी भी तरह की समस्याओं के समाधान के लिए संपर्क करें
आचार्य पंडित श्री नारायण जोशी
+917973281500

दो विवाह होने का मतलब है पहला विवाह/शादी का न चल पाना, और शादी का न चल पाना इसके कारण कुछ भी हो सकते है जैसे जीवनसाथी का सही न मिलना, तलाक होने के बाद दूसरी शादी होना, जीवनसाथी के द्वारा शादी के बाद छोड़ दिया जाना या किसी करण से जीवनसाथी की मृत्यु हो जाना भी दूसरी शादी का कारण बनता है इसके अलावा भी अन्य कारण होते है।दूसरी शादी होने का मतलब है सप्तम भाव और सप्तमेश पर अशुभ ग्रहों के प्रभाव के साथ कुछ कमजोर शुभ ग्रहों का प्रभाव होना साथ ही नवे भाव का बलवान होना तब ही दूसरी शादी का होना लिखा होता है क्योंकि दूसरी शादी का होना भी किस्मत से ही हो पाता है जब पहली शादी किसी भी कारण से खराब होगी तब ही दूसरा विवाह होगा और पहली शादी तब ही खराब होती है जब सप्तमेश और सप्तम भाव ज्यादा ही पाप ग्रहों से पीड़ित हो या अशुभ भावों में जाकर अस्त हो गया हो या अशुभ भावों जैसे कि 6, 8,12 भाव के स्वामी से संबंध बनाकर इन्हीं 6,8,12भाव मर बैठकर अशुभ हो गया हो।सप्तम भाव, सप्तमेश पर कम से कम दो पाप/क्रूर ग्रहो शनि मंगल राहु केतु में से किन्हीदो ग्रहो का प्रभाव हो और सप्तमेश कमजोर हो साथ ही ज्यादा शुभ ग्रहों का प्रभाव सातवे भाव पर न हुआ विशेष रूप से बलवान गुरु का तब शादी टूटेगी और तलाक हो जाएगा।इसके अलावा सप्तमेश/सप्तम भाव शनि राहु मंगल केतु में से किन्ही दो या दो से ज्यादा ग्रहो से पीड़ित हो और आठवे भाव का स्वामी भी सप्तम भाव या सप्तमेश हो पीड़ित करे तब ऐसी स्थिति में जीवनसाथी की मृत्यु हो जाती है तब यह कारण दूसरे विवाह का बनता है क्योंकि आठवां भाव मृत्यु का है जब पाप ग्रहों के साथ अशुभ अष्टमेश का प्रभाव सप्तम भाव या भावेश पर होगा और शुभ ग्रहों का ज्यादा प्रभाव सातवे भाव/भावेश पर न होगा तब जीवनसाथी की मृत्यु हो जाती है।इसी स्थिति में छठे घर का या इस भाव के स्वामी का प्रभाव होने पर रोग, बीमारी के कारण मृत्यु हो सकती है और 12वे भाव का प्रभाव पाप/क्रूर ग्रहो सहित हुआ तब किसी न किसी तीसरे व्यक्ति या किसी घटना के कारण दोनो जीवनसाथी शादी के बाद अलग हो जाते है क्योंकि 12वा भाव दूर करने का है।। इस कारण से पहली शादी खंडित होती है और दूसरी शादी हो इसके लिए सातवे भाव पर शुभ ग्रहों या ग्रह की दृष्टि और सप्तमेश का केंद्र त्रिकोण भाव मे बैठकर शुभ ग्रह या ग्रहो के प्रभाव में होना साथ ही दूसरी शादी के लिए महत्वपूर्ण भाव जो कि भाग्य का भी है नवा भाव/भावेश बलवान हो साथ ही सप्तमेश या सप्तम भाव से संबंध करता हो तब ऐसे जातक/जातिका की दूसरी शादी जरूर हो जाती है।दूसरी शादी के लिए नवे भाव की भूमिका भाग्य(नसीब का घर) के कारण है साथ ही नवमेश सप्तमेश का संबंध भाग्यशाली यह भी तय कर देता है कि विवाह होना जीवन मे लिखा है और शुभ ग्रहों का प्रभाव भी शादी पर है तब दूसरा विवाह होने के बाद दूसरे विवाह का सुख भी होगा।। #उदाहरण_अनुसार:- कन्या लग्न की कुंडली मे सप्तमेश गुरु बनता है।माना किसी जातक की कन्या लग्न की कुंडली है अब सप्तमेश गुरु दसवे भाव मे अष्टमेश मंगल के साथ बेठा हो, यहाँ शनि भी छठे भाव स्वामी होने से अपनी मूलत्रिकोण राशि कुम्भ से मारक है तो गुरु मंगल के साथ बेठा हो और शनि की दृष्टि गुरु पर पड़ जाती हो साथ ही इन्ही अशुभ ग्रहों की दशाएं शादी होने के बाद आ जाती हो तब जीवनसाथी की मृत्यु किसी दुर्घटना या बीमारी से हो जाएगी क्योंकि कन्या लग्न में शनि मंगल दोनो ही मारक रोग और शोक देने वाले ग्रह है। अगर गुरु बलि हुआ और शुक्र बुध का सहयोग सप्तमेश गुरु को हुआ तब मृत्यु जैसा तो कुछ नही होगा लेकिन तलाक हो सकता है साथ ही दूसरा विवाह यहाँ होगा ही तब, क्योंकि शुक्र यहाँ कन्या लग्न में भाग्येश भी होता है जिसका साथ दूसरी शादी होने में जरूरी होता है साथ ही बुध लग्नेश होकर यहाँ दूसरी शादी होने में मदद करेगा और फिर वह चलेगी भी, अगर हाँ यहाँ सप्तमेश गुरु को शुक्र बुध का साथ न मिले और सप्तमेश गुरु बलवान हुआ तब शादी दूसरी मुश्किल होती है।यह स्थिति लड़के ही कुंडली मे हो तब दूसरी शादी होने के लिए सप्तमेश सहित, पत्नी और शादी का कारक शुक्र बलवान जरूर होना जरूरी होता है ऐसे ही लड़की की कुंडली होती तब वहां सप्तमेश सहित गुरु क्व बलवान होना जरूरी हो जाता है।अगर ऐसी स्थिति है और नवे भाव का भी शादी को सहयोग है तब दूसरी शादी हो जाती है।सप्तमेश शुक्र/गुरु के ज्यादा पीड़ित होने पर,कमजोर होने पर दूसरी शादी भी आसानी से होना संभव नही होगा।इसके साथ ही ऐसी स्थिति में दूसरी शादी योग होने पर भी यदि सप्तमेश या सप्तमेश जिस ग्रह के साथ संबंध बनाकर बैठा हो तब सप्तमेश या सप्तमेश से संबंधित ग्रह की दशा उस समय चल रही हो तब बहुत जल्द और आसानी से दूसरी शादी हो जाती है, सप्तमेश, शुक्र/गुरु लड़के लड़की अनुसार बलवान जरूर होने चाहिए, ऐसी स्थिति में सप्तमेश की दशा न भी हो लेकिन लड़के की कुंडली मे बलवान शुक्र और लड़की की कुंडली मे बलवान गुरु की दशा भी शादी करा देती है साथ ही विवाह, वैवाहिक जीवन को सुखद बनाने वाले या कह कहे सप्तम भाव के कुछ सहयोगी भाव होते है जैसे दूसरा(परिवार)चौथा(गृहस्थी)और बारहवा(शैय्या सुख) साथ ही पंचम भाव जो कि प्यार का है जिसकी शादी में या खुशहाल शादी के लिए प्यार की बहुत जरूर होती है इनका भी बलवान होना दूसरे विवाह सुख को देने में प्रबल सहायक होता है क्योंकि सप्तम भाव शादी के साथ अन्य विषयों का भी है लेकिन संपूर्ण तरह से शादी के विचार के लिए महत्तपूर्ण रूप से सप्तम भाव गुरु/शुक्र के अलावा 2,4,12 भाव/भावेशों का भी शुभ होना दूसरे विवाह और दूसरे वैवाहिक जीवन की स्थिति को मजबूत करता है। इस तरह दो विवाह कई जातको के होते भी है, और यह तब ही होते है जब सप्तमेश सप्तम भाव संबंधी ऊपर पोस्ट में लिखे योग बनते हो साथ ही सप्तमेश लड़के/लड़की के शादी कारक शुक्र/गुरु बलवान होते हो।

29/08/2020

वास्तु दोष है क्या..? पहले इसे समझिये...

वास्तु दोष व्यक्ति को गलत मार्ग की और अग्रसर करते हैं.. वास्तु ठीक नहीं तो आपके घर के बच्चे अपना मार्ग भटक सकते हैं और गलत निर्णय लेकर अपना जीवन खराब कर सकते हैं..वास्तु दोष सबसे पहले मन और हृदय को प्रभावित करके बुद्धि को नष्ट-भ्रष्ट कर देते हैं सम्पूर्ण वास्तु शास्त्र दिशाओं पर ही निर्भर होता है क्योंकि वास्तु की दृष्टि से हर दिशा का अपना एक अलग महत्व है..

जहां वास्तुदोष होता है वह कई तरह की समस्याओं का कारण बनता हैं.. इसलिए जीवन के सुगम संचालन के लिए जरूरी होता हैं कि वास्तुदोष को जानकर उन्हें दूर किया जाए.. आज हम कुछ ऐसे वास्तु दोषों का उल्लेख कर रहे हैं जो किसी आवासीय या व्यावसायिक भवन में सामान्य रूप से देखे अथवा अनुभव किये जाते हैं..तो आइये जानते हैं भवन के वास्तुदोषों के उन संकेतों के बारे में.

स्वास्थ्य सबंधित वास्तु दोष

सर्दी-जुकाम: यदि मकान के ब्रहमस्थल में दोष है और आप अक्सर इसमें अपना समय गुजारते है तो आप सर्दी-जुकाम से पीड़ित रहेंगे. डायबिटीज-यदि भवन के अग्नि कोण और ईशान कोण में दोष है तो आपको डायबिटीज होने की ज्यादा सम्भावना है। यदि परिवार में किसी को डायबिटीज पहले से है तो फिर डायबिटीज को नियन्त्रण में लाना मुश्किल रहेगा। इसलिए मकान के अग्नि कोण व ईशान कोण का दोष पहले समाप्त करें.

उच्च रक्तचाप: उच्च रक्तचाप-अगर आपके भवन के उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में किसी प्राकर का वास्तुदोष है तो घर में रहने वाले लोग हीन भावना से ग्रस्त रहेंगे। हीन भावना-यदि आपके घर में वायव्य व नैऋृत्य कोण में कोई दोष है तो आपके बच्चें, महिलायें व घर में रहने वाले सदस्य अक्सर हीन भावना से ग्रस्त रहेंगे.

आयुक्षय कष्ट: अगर आपका मकान मार्ग या गली के अन्त में है तो उसमें रहने वाले सदस्य अक्सर कष्ट में रहेंगे। रोग-यदि आपके भवन पर किसी वृक्ष, मन्दिर आदि की छाया पड़ रही है तो उस घर में रहने वाले सदस्य आये दिन रोग के शिकार बने रहेंगे। आयुक्षय-यदि नैऋृत्य कोण में कुआं आदि है तो उस घर में रहने वाले लोगों की आयुक्षय होती है।

वास्तु दोष व निवारण

भवन में रहने वाले लोगों का मन अशांत रहता हो अथवा उनमें नास्तिकता की भावना बढ़ रही हो तो वहां उत्तर-पूर्व यानी ईशान दिशा दोषपूर्ण हो सकती है। निवारण के लिए इस दिशा को खाली और साफ़ रखना चाहिए तथा इस दिशा में सरस्वती यंत्र सिद्ध करके स्थापित कर देना चाहिए.

भवन की पूर्व दिशा का दक्षिण या पश्चिम दिशा से ऊंचा अथवा दोषपूर्ण होने के कारण परिवार में वंश वृद्धि रुकने की संभावना बनी रहती है। उपाय के तौर पर पूर्व दिशा में श्री गोपाल यंत्र सिद्ध करके स्थापित करें तथा उत्तर-पूर्व दिशा को खुला और साफ़ रखें.

भवन में स्थापित मशीनें या उपकरणों के बार-बार खराब होने तथा काम करने वाले नौकर या कर्मियों द्वारा मालिक के आदेशों की जानबूझकर अवहेलना करने की समस्या हो तो इसका कारण पश्चिम दिशा का दोषपूर्ण होना होता है। निवारण के लिए पश्चिम दिशा में शनि या मत्स्य यंत्र सिद्ध करके स्थापित कर देना चाहिए.

बनते हुए कामों में रुकावट आना तथा टोना-टोटका या बुरी आत्माओं का असर बने रहना भवन के ब्रह्म स्थल के भारी एवं दोषपूर्ण होने की वजह हो सकता है। इसलिए भवन के इस अत्यंत महत्वपूर्ण भाग को हमेशा खाली, साफ़ एवं खुला रखना ही श्रेष्ठ उपाय है। ब्रह्म स्थल में तुलसी जी को रखना और नियमित रूप से जल चढ़ाकर दीपक जलाना भी वास्तु दोष के निवारण का आसान तरीका है.

भवन में उत्तर-पश्चिम यानी वायव्य दिशा के दोषपूर्ण होने की वजह से कन्याओं के विवाह में अनुचित देरी होती है तथा पड़ोसियों से अकारण ही विवाद की स्थिति बनी रहती है। इस समस्या को दूर करने के लिए विवाह योग्य कन्याओं को उत्तर-पश्चिम दिशा में सुलाना चाहिए तथा स्वयं पंचमुखी रुद्राक्ष की माला शुक्ल पक्ष के सोमवार को धारण करना चाहिए.

अगर भवन में अक्सर चोरी की घटनाएं होती हों तो इसका कारण दक्षिण-पश्चिम यानी नैऋत्य दिशा का खुला या नीचा होना माना जाता है. इस दोष के निवारण के लिए इस दिशा को बंद रखते हुए सिद्ध किया हुआ राहु यंत्र स्थापित करने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं.

परिवार के सदस्यों में यदि आलस्य और नींद न आने की समस्या दिखाई दे रही हो तो, आय से अधिक खर्चा हो तथा प्रयासों के बावजूद आय के स्थाई साधन न बन पा रहे हों तो इसका कारण उत्तर दिशा का दक्षिण दिशा से अधिक ऊंचा होना अथवा अन्य दोष होना हो सकता है। निवारणार्थ उत्तर दिशा को साफ़ रखें और श्री यंत्र को सिद्ध करके स्थापित करें वहीँ, सदैव दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोने की आदत डालें.
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29/08/2020

हनुमानजी के इस उपाय से हर रोग ठीक हो जाएगा :-
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पानी जीवन का आधार है। इसके बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। इस पानी को यदि तंत्र प्रयोग कर अभिमंत्रित कर लिया जाए तो इसके सेवन से कई नाइलाज रोग भी ठीक हो सकते हैं। पानी को अभिमंत्रित करना बहुत ही आसान है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे मुख्य बात श्रद्धा व विश्वास की है। जानते हैं कि किस उपाय से साधारण पानी अमृत के समान बन सकता है।

उपाय :-

सबसे पहले हनुमानजी की एक ऐसी मूर्ति लेकर आए जिसमें उन्हें संजीवनी बूटी सहित पूरा पहाड़ लेकर उठाकर ले जाते हुए दिखाया गया हो। मंगलवार के दिन थोड़ा सा पानी लेकर तांबे के बर्तन में रखें। फिर उस बर्तन में सिंदूर लगाकर तिलक करें। इसके बाद हनुमानजी की मूर्ति उस पानी में डूबो दें।
फिर हनुमान बाहुक का पांच बार पाठ करें। पाठ समाप्त होने पर हाथ जोड़कर उठ जाएं। चौबीस घंटे के बाद हनुमानजी की मूर्ति व हनुमान बाहुक की पुस्तक को किसी नदी में प्रवाहित कर दें। अब यह जल रोगी को थोड़-थोड़ा पिलाते रहे। कुछ ही दिनों में आप देखेंगे कि रोगी धीरे-धीरे ठीक हो रहा है ।

29/08/2020

🌹।।हर हर महादेव शम्भो काशी विश्वनाथ वन्दे ।🌹।
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👉 कालसर्प योग और उसके सटीक उपाय ---
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| 👉कालसर्प योग के प्रकार, मूलरूप से इस समय 12 प्रकार के कालसर्प योग हैं जो विख्यात सर्पों के नाम पर आधारित हैं. कई बार यह योग जातक को बहुत ऊंचाई पर भी ले जाते है इसलिए ऐसा कहना गलत होगा की यह सब के लिए अशुभ है आइये जानते है 12 प्रचलित योग जो इस प्रकार से है

1. अनंत कालसर्प योग
2. कुलिक कालसर्प योग
3. वासुकि कालसर्प योग
4. शंखपाल कालसर्प योग
5. पदम कालसर्प योग
6. महापदम कालसर्प योग
7. तक्षक कालसर्प योग
8. कारकोटक कालसर्प योग
9. शंखचूड़ कालसर्प योग
10. घातक कालसर्प योग
11. विषधर कालसर्प योग
12. शेषनाग कालसर्प योग .

👉कालसर्प दोष और कष्ट --
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👉1.अनंत कालसर्प योग-
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👉यदि लग्न में राहु एवं सप्तम् में केतु हो, तो यह योग बनता है. जातक कभी शांत नहीं रहता. झूठ बोलना एवं षड़यंत्रों में फंस कर कोर्ट-कचहरी का चक्कर लगाता रहता है.l

👉2.कुलिक कालसर्प योग-
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👉यदि राहु धन भाव में एवं केतु अष्टम हो, तो यह योग बनता है. इस योग में पुत्र एवं जीवन साथी सुख, गुर्दे की बीमारी, पिता सुख का अभाव एवं कदम कदम पर अपमान सहना पड़ सकता है.l

👉3.वासुकी कालसर्प योग-
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👉यदि कुंडली के तृतीय भाव में राहु एवं नवम भाव में केतु हो एवं इसके मध्य सारे ग्रह हों, तो यह योग बनता है. इस योग में भाई-बहन को कष्ट, पराक्रम में कमी, भाग्योदय में बाधा, नौकरी में कष्ट, विदेश प्रवास में कष्ट उठाने पड़ते हैं.l

👉4.शंखपाल कालसर्प योग-
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👉यदि राहु नवम् में एवं केतु तृतीय में हो, तो यह योग बनता है. जातक भाग्यहीन हो अपमानित होता है, पिता का सुख नहीं मिलता एवं नौकरी में बार-बार निलंबित होता है.l

👉5. पद्म कालसर्प योग-
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👉अगर पंचम भाव में राहु एवं एकादश में केतु हो तो यह योग बनता है, इस योग में संतान सुख का अभाव एवं वृद्धा अवस्था में दुखद होता है. शत्रु बहुत होते हैं, सट्टे में भारी हानि होती है.

👉6.महापद्म कालसर्प योग-
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👉यदि राहु छठें भाव में एवं केतु व्यय भाव में हो, तो यह योग बनता है इसमें पत्नी विरह, आय में कमी, चरित्र हनन का कष्ट भोगना पड़ता है.l

👉7.तक्षक कालसर्प योग-
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👉 यदि राहु सप्तम् में एवं केतु लग्न में हो तो यह योग बनता है. ऐसे जातक की पैतृक संपत्ति नष्ट होती है, पत्नी सुख नहीं मिलता, बार-बार जेल यात्र करनी पड़ती है.l

👉8.कर्कोटक कालसर्प योग-
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👉यदि राहु अष्टम में एवं केतु धन भाव में हो, तो यह योग बनता है. इस योग में भाग्य को लेकर परेशानी होगी. नौकरी की संभावनाएं कम रहती है, व्यापार नहीं चलता, पैतृक संपत्ति नहीं मिलती और नाना प्रकार की बीमारियां घेर लेती हैं.l

,👉9.शंखचूड़ कालसर्प योग-
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👉 यदि राहु सुख भाव में एवं केतु कर्म भाव में हो, तो यह योग बनता है. ऐसे जातक के व्यवसाय में उतार-चढ़ाव एवं स्वास्थ्य खराब रहता है l

👉10.घातक कालसर्प योग-
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👉 यदि राहु दशम् एवं केतु सुख भाव में हो तो यह योग बनता है. ऐसे जातक संतान के रोग से परेशान रहते हैं, माता या पिता का वियोग होता है. I
👉11.विषधर कालसर्प योग-
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👉यदि राहु लाभ में एवं केतु पुत्र भाव में हो तो यह योग बनता है. ऐसा जातक घर से दूर रहता है, भाईयों से विवाद रहता है, हृदय रोग होता है एवं शरीर जर्जर हो जाता है.l

👉12.शेषनाग कालसर्प योग-
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👉यदि राहु व्यय में एवं केतु रोग में हो, तो यह योग बनता है. ऐसे जातक शत्रुओं से पीड़ित हो शरीर सुखित नहीं रहेगा, आंख खराब होगा एवं न्यायालय का चक्कर लगाता रहेगा.l

👉*काल सर्प योग में जन्मे जातक में प्रायः निम्नलिखित लक्षण पाए जाते है।*
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👉1- सपने में उसे नदी, तालाब,कुए,और समुद्र का पानी दिखाई देता है।

👉2- सपने में वह खुद को पानी में गिरते एवं उससे बाहर निकलने का प्रयास करते करते हुए देखता है।

👉3- रात को उल्टा होकर सोने पर ही चेन की नींद आती है |

👉4- सपने में उसे मकान अथवा पेडों से फल आदि गिरते दिखाई देता है।

👉5- पानी से ओर ज्यादा ऊंचाई से डर लगता है |

👉6- मन में कोई अज्ञात भय बना रहता है |

👉7- वह खुद को अन्य लोगो से झगड़ते हुए देखता है।

👉8- उन्हें बुरे सपने आते है जिसमे अक्सर साँप दिखाई देता है।

👉9- यदि वह संतानहीन हो तो उसे किसी स्त्री के गोद में मृत बालक दिखाई देता है।

👉10- - सपने उसे विधवा स्त्रीयां दिखाई पड़ती है।

👉11- नींद में शरीर पर साप रेंगता महसूस होता है।

👉12- श्रवन मास में मन हमेशा प्रफुलित रहता है |

👉ये कुछ प्रमुख लक्षण है जों किसी भी कालसर्प वाले जातक में दिखाई देते है कहने का मतलब यह की इन मे से सभी लक्षण नहीं हों तो भी काफी लक्षण मिलते है | इसलिए जिसकी भी कुंडली में कालसर्प योग हों वो छोटे उपाय करे ओर जीवन में खुशियों का आनंद ले |

👉कालसर्प दोष भंग के लिए दैनिक छोटे उपाय*
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1. 108 राहु यंत्रों को जल में प्रवाहित करें।
2. सवा महीने जौ के दाने पक्षियों को खिलाएं।
3. शुभ मुहूर्त में मुख्य द्वार पर अष्टधातु या चांदी का स्वस्तिक लगाएं और उसके दोनों ओर धातु निर्मित नाग.।
4. अमावस्या के दिन पितरों को शान्त कराने हेतु दान आदि करें तथा कालसर्प योग शान्ति पाठ कराये।
5. शुभ मुहूर्त में नागपाश यंत्रा अभिमंत्रित कर धारण करें और शयन कक्ष में बेडशीट व पर्दे लाल रंग के प्रयोग में लायें।
6. हनुमान चालीसा का 108 बार पाठ करें और मंगलवार के दिन हनुमान पर सिंदूर, चमेली का तेल व बताशा चढ़ाएं।.
7. शनिवार को पीपल पर शिवलिंग चढ़ाये व मंत्र जाप करें (ग्यारह शनिवार )
8. सवा महीने देवदारु, सरसों तथा लोहवान - इन तीनों को जल में उबालकर उस जल से स्नान करें।
9. काल सर्प दोष निवारण यंत्रा घर में स्थापित करके उसकी नित्य प्रति पूजा करें ।
10. सोमवार को शिव मंदिर में चांदी के नाग की पूजा करें, पितरों का स्मरण करें तथा श्रध्दापूर्वक बहते पानी में नागदेवता का विसर्जन करें।
11. श्रावण मास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें।
12. प्रत्येक सोमवार को दही से भगवान शंकर पर - हर हर महादेव' कहते हुए अभिषेक करें। हर रोज श्रावण के महिने में करें।
13. सरल उपाय- कालसर्प योग वाला युवा श्रावण मास में प्रतिदिन रूद्र-अभिषेक कराए एवं महामृत्युंजय मंत्र की एक माला रोज करें।
14. यदि रोजगार में तकलीफ आ रही है अथवा रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा है तो पलाश के फूल गोमूत्र में डूबाकर उसको बारीक करें। फिर छाँव में रखकर सुखाएँ। उसका चूर्ण बनाकर चंदन के पावडर में मिलाकर शिवलिंग पर त्रिपुण्ड बनाएँ। 41 दिन दिन में नौकरी अवश्य मिलेगी।.
15. शिवलिंग पर प्रतिदिन मीठा दूध उसी में भाँग डाल दें, फिर चढ़ाएँ इससे गुस्सा शांत होता है, साथ ही सफलता तेजी से मिलने लगती है।
16. किसी शुभ मुहूर्त में ओउम् नम: शिवाय' की 21 माला जाप करने के उपरांत शिवलिंग का गाय के दूध से अभिषेक करें और शिव को प्रिय बेलपत्रा आदि श्रध्दापूर्वक अर्पित करें। साथ ही तांबे का बना सर्प शिवलिंग पर समर्पित करें।
17. शत्रु से भय है तो चाँदी के अथवा ताँबे के सर्प बनाकर उनकी आँखों में सुरमा लगा दें, फिर शिवलिंग पर चढ़ा दें, भय दूर होगा व शत्रु का नाश होगा।
18. यदि पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका में क्लेश हो रहा हो, आपसी प्रेम की कमी हो रही हो तो भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति या बालकृष्ण की मूर्ति जिसके सिर पर मोरपंखी मुकुट धारण हो घर में स्थापित करें एवं प्रतिदिन उनका पूजन करें एवं ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय नम: शिवाय का यथाशक्ति जाप करे।
कालसर्प योग की शांति होगी।
19. किसी शुभ मुहूर्त में मसूर की दाल तीन बार गरीबों को दान करें।
20. किसी शुभ मुहूर्त में सूखे नारियल के फल को बहते जल में तीन बार प्रवाहित करें तथा किसी शुभ मुहूर्त में शनिवार के दिन बहते पानी में तीन बार कोयला भी प्रवाहित करें
21. मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का 108 बार पाठ श्रध्दापूर्वक करें।
22. महामृत्युंजय कवच का नित्य पाठ करें और श्रावण महीने के हर सोमवार का व्रत रखते हुए शिव का रुद्राभिषेक करें।
23. मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का 108 बार पाठ श्रध्दापूर्वक करें।
24. 86 शनिवार का व्रत करें और राहु,केतु व शनि के साथ हनुमान की आराधना करें। शनिवार को श्री शनिदेव का तैलाभिषेक करें
25. नव नाग स्तोत्रा का एक वर्ष तक प्रतिदिन पाठ करें।
26. प्रत्येक बुधवार को काले वस्त्रों में उड़द या मूंग एक मुट्ठी डालकर, राहु का मंत्रा जप कर भिक्षाटन करने वाले को दे दें। यदि दान लेने वाला कोई नहीं मिले तो बहते पानी में उस अन्न हो प्रवाहित करें। 72 बुधवार तक करने से अवश्य लाभ मिलता है।
27. कालसर्प योग हो और जीवन में लगातार गंभीर बाधा आ रही हो तब किसी विद्वान ब्राह्मण से राहु और केतु के मंत्रों का जप कराया जाना चाहिए और उनकी सलाह से राहु और केतु की वस्तुओं का दान या तुलादान करना चाहिए।)-
28. शिव के ही अंश बटुक भैरव की आराधना से भी इस दोष से बचाव हो सकता है।
29. प्रथम पूज्य शिव पुत्र श्री गणेश को विघ्रहर्ता कहा जाता है। इसलिए कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए गणेश पूजा भी करनी चाहिए।
30-पुराणों में बताया गया है कि भगवान श्री कृष्ण ने कालिय नाग का मद चूर किया था। इसलिए इस दोष शांति के लिए श्री कृष्ण की आराधना भी श्रेष्ठ है।
31. नागपंचमी या सोमवती अमावश्या के दिन ही शिव मंदिर में जाकर नाग-नागिन का जोड़ा चढ़ाएं एवं इस मंत्र का 5100 जाप स्वयं करे
शिवगायत्री मंत्र : - 'ॐ तत्पुरुषाय विद्‍महे, महादेवाय धीमहि तन्नोरुद्र: प्रचोदयात्।
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️विशेष -इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जप शिव पूजन अर्चन देवी स्तोत्र का पाठ या बजरंगबाण का पाठ निरंतर करने से शांति हो जाती है ।।
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29/08/2020

*कुछ ज्योतिष सुझाव-*

*1. जिन लोगों की कुंडली में सूर्य नीच राशि में हो या राहु से पीड़ित हो तो ऐसे व्यक्तियों में आत्मविश्वास की बहुत कमी बनी रहती है ऐसे लोगो के लिए "आदित्य हृदय स्तोत्र" का पाठ करना अमृत तुल्य कार्य करता है और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है।*

*2. यदि मंगल कुंडली में आठवे भाव में स्थित हो या कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो ऐसे व्यक्तियों को वाहन चलते समय बहुत सावधानी रखनी चाहिए अष्टम मंगल दुर्घटनाएं अधिक कराता है।*

*3. यदि कुंडली में केतु की दशा के समय जीवन में बाधाये अधिक आ रही हों तो गणेश जी की उपासना करें लाभ मिलेगा।*

*4. यदि कुंडली में मंगल नीच राशि (कर्क) में हो, राहु के साथ हो या पाप भाव (6,8,12) में होने से पीड़ित हो तो ऐसे में व्यक्ति को लेंड प्रोपर्टी या जमीन जायदात से जुड़े कार्य नहीं करने चाहिए हानि होती है।*

*5. यदि कुंडली में चन्द्रमाँ नीचस्थ या पाप प्रभाव में होने से मानसिक अस्थिरता और तनाव की स्थिति रहती हो तो चाँदी की एक ठोस गोली का लॉकेट सफ़ेद धागे के साथ गले में धारण करें लाभ होगा।*

*6. यदि संतान सुख में कमी हो या संतान आज्ञाकारी ना हो तो ॐ ग्राम ग्रीम ग्रौम सः गुरवे नमः का जाप करे सकारात्मक परिवर्तन होगा।*

*7. राहु की दशा में दुष्परिणाम मिल रहे हों तो सफ़ेद चन्दन की माला गले में धारण करें लाभ होगा।*

*8. जिन लोगों की कुंडली में शनि स्व उच्च राशि (मकर,कुम्भ,तुला) में हो या शुभ स्थान में बली हो तो ऐसे व्यक्तियों के लिए तकनीकी कार्य, मसीनों, पुर्जों, लोहे, स्टील और केमिकल प्रोडक्ट्स का कार्य लाभकारी होता है।*

*9. यदि जीवन में बार बार दुर्घटना या एक्सीडेंट की स्थिति बनती हो तो हनुमान चालीस और संकटमोचन हनुमानाष्टक का रोज पाठ करें लाभ होगा।*

*10. जिन लोगों की कुंडली में लाभेश (ग्यारहवे भाव का स्वामी) छटे, आठवे, बारहवे भाव में होकर कमजोर हो, नीच राशि में में हो या अन्य प्रकार पीड़ित हो तो ऐसे लोगों को बिजनेस के क्षेत्र में नहीं जाना चाइये हानि की संभावनाएं अधिक होती हैं।*

*11. यदि जीवन में यश और प्रसिद्धि की कमी हो तो सूर्य की उपासना करें सकारात्मक परिवर्तन होंगे।*

*12. यदि कुंडली में चन्द्रमाँ स्व उच्च राशि (कर्क,वृष) में होकर शुभ स्थान में बलि हो या दशम भाव में बली होकर स्थित हो और लाभेश शुभ स्थिति में हो तो ऐसे व्यक्ति को कन्फेक्शनरी, डेयरी प्रोडक्ट और पानी से जुड़े कार्य करना लाभदायक होता है।*

*13. यदि कुंडली में शुक्र पीड़ित होने से आर्थिक पक्ष संघर्षपूर्ण हो तो प्रत्येक शुक्रवार को गाय को खीर खिलाएं लाभ होगा।*

*14. यदि कुंडली के कहते भाव में कोई पाप योग (जैसे गुरुचांडाल योग, ग्रहण योग, अंगारक योग) बन रहा हो, छटे भाव में कोई पाप ग्रह नीच राशि में हो या कुंडली में मंगल बहुत पीड़ित हो तो ऐसे व्यक्ति को किसी भी प्रकार का लोन या कर्ज लेने से बचना चाहिए ऐसे में कर्ज या लोन का रिपेमेंट करने में बहुत बाधायें आती हैं।*

*15. यदि शीत रोग (नजला, जुखाम, कफ, खांसी) अधिक परेशान करते हों तो चन्द्रमाँ के मन्त्र ॐ सोम सोमाय नमः का नियमित रूप से जाप करें लाभ होगा।*

*16. यदि शिक्षा में बार बार बाधायें आती हों तो बृहस्पति मन्त्र ॐ ग्राम ग्रीम ग्रौम सः गुरवे नमः का नियमित रूप से जाप करें सकारात्मक परिवर्तन होंगे।*

*17. यदि मन में निराशा का भाव रहता हो तो नियमित रूप "आदित्य हृदय स्तोत्र" का पाठ करें अवश्य लाभ होगा।*

*18. जिन जातकों की कुंडली में बुध स्व उच्च राशि (मिथुन,कन्या) में होकर बली हो या शुभ स्थानों में होकर बली स्थिती में हो तो ऐसे व्यक्तियों को गणनात्मक और वाणिज्य से जुड़े विषयों जैसे अकाउंटिंग, सीए., टैली, और कंप्यूटर फील्ड में अच्छी साफलता मिलती है।*

*19. यदि बच्चा रात को सोते हुए डर जाता हो तो सोते समय उसके सिराने पर या तकिये के नीचे "हनुमान चालीसा" रख दें सकारात्मक परिवर्तन होंगे।*

*20. जोड़ों के दर्द की अमास्या यदि हमेशा बनी रहती हो तो शनि मन्त्र - ॐ शम शनैश्चराय नमः का नियमित रूप से जाप करें लाभ होगा।*

*21. यदि विवाह में विलम्ब हो तो पुरुष जातक शुक्र मन्त्र - ॐ शुम शुक्राय नमः तथा स्त्री जातक मंगल मन्त्र - ॐ अंग अंगारकाय नमः का नियमित जाप करें लाभ होगा।*

*22. यदि शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के कारण अधिक बाधाएं आ रही हों तो नियमित रूप से शनिवार को पीपल पर सरसों के तेल का दिया जलाएं और गरीब व्यक्तियों को भोजन कराएं लाभ होगा।*

*23. जिन जातकों की कुण्डली में बृहस्पति और सूर्य स्व उच्च राशि या शुभ स्थानों में होकर मजबूत स्थिति में हों तो ऐसे जातकों के लिए मैनेजमेंट का फील्ड करियर के लिए अच्छा होता है।*

*24. यदि कुण्डली में कालसर्प योग के कारण जीवन में संघर्ष की अधिकता हो तो पक्षियों और कुत्तों को प्रतिदिन भोजन दें लाभ होगा।*

*25. यदि कुण्डली में बृहस्पति की दशा चल रही हो तो बृहस्पतिवार को विष्णु भगवान् को गेंदे के फूल अर्पित करें शुभ परिणाम होंगे।*

🙏🌹सबका मंगल हो 🌹🙏

29/08/2020

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