Aryan's world

Aryan's world समृद्ध एवं स्वस्थ, भारत निर्माण...!|

01/01/2016

I wish NEW YEAR 2016 bring Happiness, Peace, Prosperity and Success to you & your family.

15/12/2015

क्या विवाह-विच्छेद (तलाक) या प्रेम-विच्छेद का जश्न (ब्रेक-अप पार्टी) मनाया जाना चाहिए....? अगर हा तो क्यू...?

खाली दिमाग शैतानी हरकतों का घर, बस यू ही आज मेरे जेहन में प्रश्न उठ गया.
प्रेम व स्नेहवश श्रृंगार रस में लीन कोई किशोर, युवा, अथवा विवाहित जोड़ा जब एक दूसरे से अलग होते है..! तो अधिकांशतः स्वतः ही एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोपित करते हुए अपनी खिन्नता, भड़ास, रोष आदि भाव प्रकट कर उसे अपना शत्रु मानने लगते है।
उस पल में वो उन पलो को भूल जाते है जिसमे उन्होंने
साथ रहने का वादा किया था,
नायक/नायिका एक दूसरे की समस्या का समाधान करने के लिये वो अपना सब कुछ झोंकने को तत्पर रहते थे
फ़ोन पर गुड नाइट के बाद तुम फोन काटो-तुम फ़ोन काटो कहने में घंटे बीत जाते थे अंत में 3 बोलते ही दोनों फोन काटते थे
उन पलो में क्लास के दौरान का वक्त भी कम पड़ता था तो साथ में बाहर निकल जाते थे
साथ खाने की जिद करना, फ़ोन पे रोज रोज बात करना, बात न होने पर अधमरा सा हो जाना
इतना प्रेम होने के बाद भी अलग होने के बाद एक दूसरे को हेय दृष्टि से देखना, कोसना, रोष भाव रखना कहा से तर्कशील है।

अब मुद्दे पर आते है बात हो रही थी की ब्रेक-अप पार्टी के बाद जश्न क्यू "ये आपको महज तर्कहीन और मूर्खतापूर्ण विचार लग रहा होगा" लेकिन आप एक बार सोचिये तो सही।
अगर मुझे मेरी प्रेमिका/पत्नी से अलग होना है तो क्या जरुरत है बखेड़ा खड़ा कर उसकी छिछा-लेदर करने की, क्या आवश्यक्ता है उसकी गलतिया खोजने की या उससे कोई गलती कराने की, क्या मिलेगा मुझे उसके दामन को मैला करके....! मैं सीधे और सरल शब्दों में भी तो कह सकता हु की "मेरी कुछ समस्याये है अतः मैं तुम्हारा साथ यही छोड़ कर तुम्हे सभी बंधनो से मुक्त कर रहा हु"
कल हमारे "अलगाव का जश्न" है। आपसी रंजिश और कटुता को एक और दिन के लिए हम दोनों ताख पर रख कर शांति पूर्वक ससम्मान एक दूसरे अलग हो जाये।

निष्कर्ष=>
1.मेरा दावा है की भविष्य में कोई कभी एक दूसरे का विरोधी नही बनेगा (कुछ अपराधो में कमी आएगी ही आएगी)
2.भविष्य में ये बहुत संभव है की दोनों आपसी कटुता का त्याग करते हुए पुनः एक दूसरे के संपर्क में आएंगे
3.टिन ऐज अर्थात किशोर वर्ग से इतनी समझदारी की आप अपेक्षा तभी कर सकते है जब उन्हें इन चीजो के बारे में विस्तार से बताएँगे फिर भी मैं ये उम्मीद नही कर सकता (ये मेरा खुद का अनुभव है)
4. उपर्युक्त विचार को सर्वाधिक व्यवहारिक रूप 26+ अथवा विवाहित दंपत्ति ही दे सकते है
5. भविष्य में इस ब्रेक-अप पार्टी का उत्थान होगा।

02/11/2015
23/09/2015
24/08/2015

हम पैदा ही गुलामी के लिए हुए...
पहले हुड़ आये और गुलाम बनाये
फिर शको के गुलाम बने, फिर क्रमशः तुर्क, मुग़ल, और अंग्रेजो की गुलामी की हमने.....भइया गुलामी तो हमारे खून में है,,,,,, और हम संस्कृति की रक्षा करने में लगे हुए है

19/08/2015

नंगे पाँव चलते "इन्सान" को लगता है
कि "चप्पल होते तो कितना अच्छा होता"
बाद मेँ..........
"साइकिल होती तो कितना अच्छा होता"
उसके बाद में.........
"मोपेड होता तो थकान नही लगती"
बाद में.........
"मोटर साइकिल होती तो बातो-बातो मेँ
रास्ता कट जाता"

फिर ऐसा लगा की.........
"कार होती तो धूप नही लगती"

फिर लगा कि,
"हवाई जहाज होता तो इस ट्रैफिक का झंझट
नही होता"

जब हवाई जहाज में बैठकर नीचे हरे-भरे घास के मैदान
देखता है तो सोचता है,
कि "नंगे पाव घास में चलता तो दिल
को कितनी "तसल्ली" मिलती".....

" जरुरत के मुताबिक "जिंदगी" जिओ - "ख्वाहिश"..... के
मुताबिक नहीं.........

क्योंकि 'जरुरत'
तो 'फकीरों' की भी 'पूरी' हो जाती है, और
'ख्वाहिशें'..... 'बादशाहों ' की भी "अधूरी" रह जाती है".....

"जीत" किसके लिए, 'हार' किसके लिए
'ज़िंदगी भर' ये 'तकरार' किसके लिए...

जो भी 'आया' है वो 'जायेगा' एक दिन
फिर ये इतना "अहंकार" किसके लिए...

ए बुरे वक़्त !
ज़रा "अदब" से पेश आ !!
"वक़्त" ही कितना लगता है
"वक़्त" बदलने में.........

मिली थी 'जिन्दगी' , किसी के
'काम' आने के लिए.....
पर 'वक्त' बीत रहा है , "कागज" के "टुकड़े" "कमाने" के लिए.

श्रोत व्हाट्सऐप बाबा

16/11/2014

No family is perfect, we argue, we fight, we even stop talking to each other at times but in the end, family is family … the love will always be there.

15/11/2014

Dont lose hope. When the sun goes down, the stars come out.

06/11/2014

मोबाइल..........

मोबाइल हर आयु,वर्ग,और लिंग के लोगों के लिए अति आवश्यक वस्तु बन चुका है। व्यक्ति भोजन के बिना दिन आसानी से बिता सकता है किंतु मोबाइल के बगैर तो एक पल भी नहीं गुजार सकता है। यह हर व्यक्ति केलिए रोटी, कपड़ा और मकान के साथ चौथी आधारभूत जरुरत बन चुका है।
जितना बड़ा मोबाइल उतनी ही बड़ी समाज में उसकी इज्जत। एक समय था इसे भी जीरो फीगर के रुप में पसंद किया जाता था किंतु अब इसका फिग़र चप्पल का रुप ले चुका है। जीवन के हर कदम पर इसकी आवश्यकता महसूस की जाती है। इसके डयूटी सुबह मूर्गे की बांग के समान अलार्म बजा कर उठाने से प्रारम्भ होती है। भजन सुनाना, योग क्रियाएं करवाना, फेस बुक के जाने अनजाने फ्रेंड्स से मिलवाना, गुड मार्निंग के मैसेज दिलवाना, एक से एक उपदेशात्मक संदेश पंहुचाना, गुगल के माध्यम से अनेक वेबसाइट्स की यात्रा के साथ रात को मां की तरह लोरी सुना कर सपनों की दुनिया तक ले जाने का काम ये बड़ी बखूबी से निभा रहा है। यदि हम कहे कि ये हमारे जीवन का मार्गदर्शक है तो अतिश्योक्ति नहीं होगी। हम फेस बुक और व्हाट्स एप के संदेशों को लाइक कर, शेअर कर और कमेंटस कर कई लोगों के दिल में स्थान बना चुके हैं। हमारा पूरा समाजशास्त्र मोबाइल के भीतर समा गया है। सारे रिश्ते इसी के माध्यम से निभाए जा रहे हैं। इसके प्रति प्रेम पागलपन की हद तक पहुंच गया है। एक समाचार के अनुसार एक लड़्की मोबाइल से बात करनेमें इतनी मगन हो गई थी कि वो रेल से कट गई तो एक नाले में गिर गई। एक लड़्की सेल्फी लेते लेते छ्त पर इतनी पीछे हट गई कि वह नीचे गिर गई। रोड़ पर भी आपने देखा होगा कई लोग मन ही मन बड़्बड़ाते हुए चलते हैं जैसे कोई मानसिक विक्षिप्त हो। कई लोगों की तो सिर और कंधों के बीच इसे दबा कर गाड़ी पर बतियाने से गरदन ही तिरछी हो गई। कुछ लोगों का सोचना है कि जब से मोबाइल आया है तब से लोग लैंडलाइन को भूल गए हैं। लैंडलाइन भी गधे के सिंग और घर के रेडियो की तरह गायब हो चुका है। इसी बात की चिंता करते हुए एक कंपनी ने उसकी बैटरी को इतना कमजोर बनाया है कि आपको अक्सर मोबाइल चार्जिंग पर लगा कर रखना पड़्ता है ताकि लैंडलाइन का आभास होता रहे। इसकी तारीफ में एक डाक्टर ने तो कुछ शब्द ईजाद किए हैं। जैसे यदि मोबाइल चार्जिंग पर लगा है तो कहते है सलाइन लगी हुई है, यदि मोबाइल हेंग हो जाता है तो कहते है इसका ई.सी.जी ठीक नहीं है, इसमें वायरल इंफेक्शन हो चुका है इसे एंटी वायरल (वायरस) ड्रीप लगाना होगी। इसका कीडनी (सॉफ्टवेअर) ठीक से काम नहीं कर रहा है इसे शीघ्र ही डायलसिस (फार्मेट) करना होगा । व्हाटसएप, फेसबुक टवीटर और भी बहुत कुछ इसके सगे भाई-बहन है। इन सब को चलाने कि लिए मोबाइल नाम के श्री य्ंत्र का होना ठीक वैसा ही है जैसे शरीर के भीतर आत्मा का । ये हर घर, हाथ, पर्स, और पॉकेट में पाया जाता है। इसके पहुंच शमशान घर तक हो चुकी है। शमशान तक मुर्दे को एक से एक रिंग टोन सुनाई जाती है ताकि उसे इस संसार को छोड़ कर जाने का दुख न हो। जो संगी-साथी, नाते-रिश्तेदार अंतिम क्रिया के समय तक नहीं पहुंच पाए उनको इसके माध्यम से अंतिम दर्शन कराए जाते हैं। अंतिम संस्कार के बाद इसकी भूमिका समाप्त नहीं होती। तेरहवीं की पूजा हो या श्राद्ध पक्ष इसे मृत आत्मा की शांति के लिए, पंडित जी को लालटेन, छाता, चप्प्ल के साथ दान किया जा रहा है। मोबाइल जीवन के साथ भी और जीवन के बाद भी काम आने लगा है।

30/10/2014

modi को 2 दिन मे काला धन लाने का आदेश देने वाले जज साहब वही हैं जिन्होने प्र्ग्या ठाकुर की जमानत 2 साल से लटका रखी है ।

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211002

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