18/07/2023
लड़कियों के मुकाबले हम लड़के कम मासूम, और ज्यादा निर्दई होते हैं, हम हमेशा से ऐसे नहीं होते हैं हम भी छोटी छोटी चीजों से खुश हो जाया करते थे बहुत छोटी सी दुनियां थी हमारी दुनियादारी से दूर हम बस जीते थे, कभी लकड़ी का बल्ला, कॉस्को की बॉल, यार, बचपन,दोस्त ,मिट्टी का आंगन, पक्का चबूतरा, पहली बार ट्रेन में बैठने की ख्वाहिश पहली बार मोटर साइकिल चलाने की उम्मीद, स्कूल का बस्ता जैसी छोटी-छोटी चीजें हमें और मासूम बनाती थी
धीरे-धीरे उम्र बढ़ने लगा और लड़कों की ख्वाइश कम होने लगीं, हाफ पैंट पहन कर गेंहू पिसवाने वाले लड़के धीरे धीरे फूल पैंट पहने लगते है और जैसे जैसे इन लड़कों के पैर की लंबाई बढ़ती है ठीक वैसे ही धीरे धीरे इनकी आसमान में उड़ने की उम्मीद कम होने लगती है
अजय देवगन की तरह बाल रखने वाली हमारी जनरेशन के लड़के धीरे-धीरे विराट कोहली की तरह दाढ़ी रख कर दुनिया को देखना शुरू कर चुके थे उनके दाढ़ी के बाल पकने लगे थे मासूमियत उनकी खत्म होने के कगार पर थी और धीरे धीरे वो निर्दई बनने के कगार पर अपना कदम बढ़ाने को तैयार थे
प्यार के नाम पर ठगे जाने वाले लडके धीरे धीरे ेंस_आर_डॉग की लिस्ट में शामिल होने लगे थे, लड़कियों के तरफ़ आँख ना उठाने वाले लड़के अब इन्हें देख कर लड़किया अपना दुप्पटा संभालने लगी है ,
दिन,प्रतिदिन हर समय हर जगह इस समाज से निष्कासित होते हुऐ ये लडके दुनिया से कटते जाते है सभ्य समाज से बहिष्कार होने के बाद ये सभ्य सुसंस्कृत समाज के लिए गाली बन जाते है क्योंकि आपके सभ्य समाज में मात्र उन्नत लोगो को इज्जत दिया जाता है लेकिन ऐसे निर्लज बेहया बेशर्म लड़के समाज के लिए मात्र एक बेरूपिया सर्वनाम बन कर रह जाते है
अगर सभ्य समाज कभी संज्ञा बना कर ऐसे लड़कों की विशुद्ध विशेषता बताने की कोशिश करता है तो ये सभ्य समाज इन्हे बेरोजगार लफूया आवारा जैसे विशेष नामों से सुशोभित कर देता है
धीरे धीरे ऐसे लड़के परिवार समाज सभ्यता संस्कार से कट कर चले जाते हैं निर्दई होने से पहले यह अपनी मासूमियत को अपने हाथों से उसका गला घोट देते हैं और फिर निकल पड़ते हैं निर्दई होने के राह पर, निर्दई होने से पहले ही ये समाज इन्हे निर्दई बना देता हैं धीरे-धीरे मां के जिगर के छल्ले,सिगरेट के छल्ले में अपना भविष्य देखने लगते हैं वो निर्दई हो जाते हैं अपने भविष्य के साथ ,वो निर्दई हो जाते हैं अपने वर्तमान के साथ, वो निर्दई हो जाते हैं अपने परिवार के साथ,अपने शरीर के साथ, अपने बचपन के साथ ,अपने सपनों के साथ ............... धीरे धीरे लड़के निर्दई हो जाते है
......................................
अरे भाई , गजब , बडी अच्छी कहानी सुनाई आपने , खैर भाई आपने अपना परिचय नही दिया ,आप बताओ ना मैं आपका बहुत बड़ा वाला फैन हूं आप लिखते हो तो ऐसा लगता है जैसे आपने मेरे लिए ही लिखा है बताओ ना भाई आपका परिचय क्या है
,
,,,
,
,,
,
,
,
,
,
,
,
जी मैं वही निर्दई लड़का हूं जो खुद के बदबू से मोहब्बत करना सीख गया है ।