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Pawan goel kaul भजन सत्संग

ब्रह्म सत्य ज्ञान स्वरूप और अनंत है। जो मनुष्य परम विशुद्ध आकाश में रहते हुए भी प्राणियों के हृदय रूपी गुफा में छिपे हुए...
15/03/2026

ब्रह्म सत्य ज्ञान स्वरूप और अनंत है। जो मनुष्य परम विशुद्ध आकाश में रहते हुए भी प्राणियों के हृदय रूपी गुफा में छिपे हुए उस ब्रह्म को जानता है वह उस विज्ञान स्वरूप ब्रह्म के साथ समस्त भोगों को अनुभव करता है;इस प्रकार यह ऋचा है।

श्री हंस ज्योति मंदिर जगाधरी जिला यमुनानगर ( हरियाणा) मैं मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में होली का पर्व बड़े हर्ष...
14/03/2026

श्री हंस ज्योति मंदिर जगाधरी जिला यमुनानगर ( हरियाणा) मैं मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में होली का पर्व बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया गया। जिसकी कुछ झलकियां इस प्रकार से है।

21/02/2026
19/01/2026

श्री हंस ज्योति मंदिर- जगाधरी (हरियाणा)में मानव उत्थान सेवा समिति के तत्वाधान में श्री विभु जी महाराज का जन्म महोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिसमें सद्गुरु देव श्री सतपाल जी महाराज की आत्म अनुभवी महात्मा सिंधु बाई जी, महात्मा मेघना बाई जी, महात्मा सपना बाई जी ने अपने सत्संग भजनों से भक्तों को आनंद विहार कर दिया। जन्मदिन की खुशी में मस्ती में झूमते हुए भक्त गण।

मानव जिस लक्ष्य को लेकर संसार में आया है वह संतों की शरण में मिलेगा।शांति- सद्भावना,एकता- प्रेम,ज्ञान विवेक- पाने के लिए...
31/12/2025

मानव जिस लक्ष्य को लेकर संसार में आया है वह संतों की शरण में मिलेगा।शांति- सद्भावना,एकता- प्रेम,ज्ञान विवेक- पाने के लिए मानव को संतों की पहचान करनी होगी। सोने- चांदी को तोड़ने वाली तराजू की बाट का मोल सोने- चांदी के भाव जैसा नहीं होता।श्री गुरु महाराज जी ने यही समझाया कि शांति,आनंद या सच्चिदानंद कहने मात्र से सुख- शांति नहीं हो सकती, उसे हृदय में ही जानना होगा, क्योंकि उसका वास सबके हृदय में है।

यदि शरीर का पतन होने से पहले पहले इस मनुष्य शरीर में ही साधक, परमात्मा को साक्षात् कर सके तब तो ठीक है; नहीं तो फिर अनेक...
21/12/2025

यदि शरीर का पतन होने से पहले पहले इस मनुष्य शरीर में ही साधक, परमात्मा को साक्षात् कर सके तब तो ठीक है; नहीं तो फिर अनेक कल्पों तक नाना लोग और योनियों में शरीर धारण करने को विवश होता है।

हमारे ऋषियों ने ने कहा कि सब सुखी हों। उनकी आत्मा इतनी उन्नत थी, जब महापुरुष की आत्मा विकसित हो जाती है, उन्नत (Evolve) ...
20/12/2025

हमारे ऋषियों ने ने कहा कि सब सुखी हों। उनकी आत्मा इतनी उन्नत थी, जब महापुरुष की आत्मा विकसित हो जाती है, उन्नत (Evolve) हो जाती है स्पिरिच्युअली तो वह सारे संसार के हित के बारे में सोचते हैं, अपने गोत्र, अपने वंश, अपनी जाति के बारे में नहीं, सारे विश्व के बारे में सोचते हैं-हमारे ऋषियों का लेवल बहुत ऊॅंचा था। उन्होंने कहा कि सारे संसार में सुख- शांति हो। सब सुखी हो, संसार के अंदर शांति हो, सद्भावना हो।इसलिए हमारा उद्गार होता है- धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो और प्राणियों में सद्भावना हो।

श्वासों की माला सब के अंदर चल रही है। इसमें व्यक्ति 21600 प्राणायाम की क्रिया 24 घंटे में करता है।उसको 12 घंटे करो तो 10...
19/12/2025

श्वासों की माला सब के अंदर चल रही है। इसमें व्यक्ति 21600 प्राणायाम की क्रिया 24 घंटे में करता है।उसको 12 घंटे करो तो 10800, और इसमें भी आप इसको मूल संख्या में लो तो शून्य निकल जाते हैं तो 108 की संख्या बचती है। तो यह माला भी हमारे श्वासों की तरफ इशारा कर रही है की है मानव! जो तेरे अपने श्वास हैं,जो तेरी मन की माला है उसको फेर। माला मुझसे लड़ पड़ी, माला लड़ रही है कि तू मुझ को क्यों फिर रहा है? काठ की माला को छोड़ दे, अगर मन की माला को तुम फेरेगा जो श्वासों की माला मन की माला है उसको अगर तुम फेरेगा,तो तत्काल प्रभु का दर्शन हो जाएगा।

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