28/05/2026
घेरने नहीं सिर्फ अपने सिपाही का साथ निभाने गए थे…लोग पुलिस को बड़ी आसानी से भला बुरा कहते हैं लेकिन गलती किसी और की होती है। इस केस में मुख्य गलती हॉस्पिटल और फिर CMHO की थी लेकिन लोग कानपुर पुलिस, आईटीबीपी के कमांडेंट साहब पर नकारात्मक सकारात्मक टिप्पणी कर रहे हैं। कमांडेंट साहब अपने जवान के साथ खड़े थे जिसकी हम भी तारीफ करते हैं। अस्पतालों के मामले में पुलिस FIR कर भी सकती है लेकिन वो सिद्ध तभी होगी जब मेडिकल रिपोर्ट मिलेगी वरना कोर्ट से तत्काल FIR क्वेश हो जाएगी। दूसरा कमांडेंट साहब की गतिविधि के बारे में हमारे यूपी पुलिस के डीएसपी अनिरुद्ध सिंह जी ने लिखा है जिसे मैंने भी देखा और सही महसूस किया है। वो लिखते हैं कि “किसी ने मुझसे पूछा कि सर कानपुर में आर्म फोर्स के जवान के लिये पुलिस कमिश्नर ऑफिस घेर लिया,क्या होता है अधूरी जानकारी और नजरिया घटना क्रम को अलग दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर देता है,पहले ऑफिस घेरने के नजरिये को बताता हूँ आर्म फोर्स की ड्रिल है उनका कोई भी डेपुटी कमांडेंट से ऊपर का अधिकारी जाता है तो उनके साथ के सिपाहियों की यह ड्रिल है इस तरह कार्डिन कर खडे होना,
मैं अपना उदाहरण बताता हूँ मैं और मेरे प्रिय अनुज आर्म फोर्स में deputy sp है चुनाव में हम दोनों एरिया भ्रमण में जाते और जहाँ भी रुकते उतरते उनके सिपाही इसी ड्रिल को Follow करते थे मैंने उनको जिज्ञासा बस पूछा था तब उन्होंने मुझे इस स्टैंडर्ड ड्रिल के बारे में बताया था,
दूसरा doctor की जाँच करने का सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर है जाँच सिर्फ CMO कराएगा कोई पुलिस अधिकारी नहीं करेगा और FIR बिना CMO के जाँच के नहीं लिखी जाएगी तीसरी BNS BNSS सिर्फ पुलिस का अधिकार क्षेत्र है आर्म फोर्स का नहीं बस कुछ लोगों ने गलत नजरिये से प्रस्तुत किया है सभी अपने अपने चश्मे से देख रहे है जैसे दो फोर्स आपस में लगानेवाले थे या एक फोर्स बड़ा दूसरा छोटा यह सब प्रस्तुति है और रही बात सिपाही की तो उसकी भावनाएं है उसकी माँ है doctor गलत किया तो जाँच बाद सही होगा तो कार्यवाही भी होगी और कोई नीचे स्तर पर लापरवाही तो उस पर भी कार्यवाही होगी,सबके अपने दावे अपने इरादे है आज की दुनियां में देखने और दिखाने के 🫡।’’ कमांडेंट साहब अपने जवान के साथ खड़े थे भले ही उनका तरीका अलग रहा हो लेकिन नियत इरादा सच्चे लीडर की थी। जय हिन्द 🥰💖🥰💖🥰💖🥰💖🥰💖🥰💖🥰